उपभोक्ता कार्य विभाग प्रगतिशील कानून बनाकर उपभोक्ता संरक्षण और उपभोक्ताओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रहा है। वैश्वीकरण, प्रौद्योगिकियों, ई-कॉमर्स बाजारों आदि के नए युग में उपभोक्ता संरक्षण को नियंत्रित करने वाले ढांचे को आधुनिक बनाने की दृष्टि से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को निरस्त कर दिया गया और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 लागू किया गया।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत, किसी भी उत्पाद या सेवा के संबंध में भ्रामक विज्ञापन को ऐसे विज्ञापन के रूप में परिभाषित किया गया है, जो- (i) ऐसे उत्पाद या सेवा का गलत वर्णन करता है; या (ii) ऐसे उत्पाद या सेवा की प्रकृति, पदार्थ, मात्रा या गुणवत्ता के बारे में उपभोक्ताओं को झूठी गारंटी देता है या गुमराह करने की संभावना रखता है; या (iii) एक जांकारी देता है निहित प्रतिनिधित्व व्यक्त करता है, जो यदि निर्माता या विक्रेता या उसके सेवा प्रदाता द्वारा किया जाता है, तो यह एक अनुचित व्यापार अभ्यास होगा; या (iv) जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत, उपभोक्ताओं के अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और झूठे या भ्रामक विज्ञापन, जो एक वर्ग के रूप में जनता और उपभोक्ताओं के हित के प्रतिकूल हैं, से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की स्थापना 24.07.2020 को की गई है।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 9 जून, 2022 को भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के पृष्ठांकन के लिए दिशानिर्देश, 2022 को अधिसूचित किया है। ये दिशानिर्देश अन्य बातों के साथ-साथ प्रदान करते हैं; (ए) किसी विज्ञापन के गैर-भ्रामक और वैध होने की शर्तें; (बी) प्रलोभन के विज्ञापनों और मुफ्त दावा विज्ञापनों के संबंध में कुछ शर्तें; और, (सी) निर्माता, सेवा प्रदाता, विज्ञापनदाता और विज्ञापन एजेंसी के कर्तव्य।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने 13 निर्दिष्ट डार्क पैटर्न को सूचीबद्ध करते हुए डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए 30 नवंबर, 2023 को “डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशानिर्देश, 2023” जारी किए हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) प्रशिक्षण संस्थानों को 20 नोटिस जारी किए हैं और 8 ऐसे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) प्रशिक्षण संस्थानों पर जुर्माना भी लगाया है।
केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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