केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने 3 और 4 जुलाई को झारखंड के तीन जिलों में 5 एकलव्य आवासीय आदर्श विद्यालयों (ईएमआरएस) के निर्माण की आधारशिला रखी। केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा शनिवार (03 जुलाई) को सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड में गीता कोड़ा, चाईबासा संसदीय क्षेत्र से सांसद; झारखंड सरकार के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री चंपाई सोरेन और झारखंड में राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय का प्रथम शिलान्यास किया गया।
अर्जुन मुंडा ने शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम के हाटगम्हरिया और मझगांव प्रखंडों में एकलव्य विद्यालयों का भी शिलान्यास किया।
आदिवासी युवाओं के बेहतर भविष्य निर्माण की दिशा में कार्य को जारी रखते हुए, अर्जुन मुंडा ने 4 जुलाई को पूर्वी सिंहभूम के गुरबंदा और धालभूमगढ़ ब्लॉक में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति राज्य मंत्री चंपाई सोरेन और स्थानीय सांसद और विधायक की उपस्थिति में 2 ईएमआरएस के निर्माण की आधारशिला रखी।
इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने अनुसूचित जनजाति समुदाय के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और उनके उत्थान के लिए उनके द्वारा परिकल्पित शिक्षा की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जनजातीय कार्य मंत्री ने कहा कि ईएमआरएस का निर्माण कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा और हम फिर से यहां पर उद्घाटन के लिए उपस्थित होंगे। उन्होंने आगे बताया कि ईएमआरएस जनजातीय कार्य मंत्रालय का प्रमुख कार्यक्रम है और यह परिकल्पना की गई है कि ईएमआरएस में शिक्षा का स्तर जवाहर नवोदय विद्यालयों के बराबर होगा।
अर्जुन मुंडा ने और अधिक जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, जिसमें प्रत्येक स्कूल में 480 छात्र अध्ययन करेंगे। इन विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। छात्रों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारत जैसे-जैसे आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, यह योजना आदिवासी क्षेत्रों के लिए एक नई क्रांति का सूत्रधार है। उन्होंने कहा कि झारखंड के सभी एकलव्य आदर्श विद्यालयों में तीरंदाजी खेल की सुविधा उपलब्ध होगी।
रविवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि 2021-22 स्वतंत्रता का 75वां वर्ष होगा और इस वर्ष स्वीकृत एकलव्य विद्यालय शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी वर्षगांठ मनाई जाएगी, तो एकलव्य विद्यालयों के पूर्व छात्र हर जगह महत्वपूर्ण पदों पर आसीन होंगे और तब तक वे अपनी योग्यता साबित कर कर चुके होंगे।
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