इसका उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के हित में आपसी गतिविधियों में तालमेल बनाना है, ताकि पारस्परिक रूप से काम करने में विशेषज्ञता का उपयोग हो और हितधारकों को बेहतर मूल्य मिल सके।
एपीडा, हितधारकों के क्षमता-निर्माण के लिए विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवर और विशिष्ट विशेषज्ञता वाले संगठनों और संस्थानों के साथ तालमेल के लिए सहयोगी दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और कृषि तथा इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए समाधान प्रदान कर रहा है। यह भारत सरकार द्वारा घोषित कृषि निर्यात नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है। कृषि निर्यात नीति का निर्माण कृषि निर्यात उन्मुख उत्पादन बढाने, निर्यात संवर्धन, किसान को बेहतर मूल्य की प्राप्ति और भारत सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों में तालमेल स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया था। यह “किसान केन्द्रित दृष्टिकोण” पर आधारित है, जिसमें स्रोत पर मूल्यवर्धन के माध्यम से बेहतर आय की प्राप्ति सुनिश्चित करना तथा मूल्य-श्रृंखला में नुकसान को कम करने में सहायता प्रदान करना शामिल है। इसलिए नीति, देश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में उत्पाद विशिष्ट समूहों को विकसित करने के दृष्टिकोण को अपनाने का सुझाव देती है ताकि आपूर्ति से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों जैसे मिट्टी पोषक तत्व प्रबंधन, उच्च उत्पादकता, बाजार उन्मुख फसल-किस्म को अपनाना, बेहतर कृषि पद्धतियों का उपयोग आदि से निपटने में मदद मिल सके।
एईपी के कार्यान्वयन के लिए एपीडा राज्य सरकारों के साथ लगातार संपर्क में है। महाराष्ट्र, यूपी, केरल, नगालैंड, तमिलनाडु, असम, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मणिपुर और सिक्किम राज्यों ने राज्य-विशिष्ट कार्य योजना को अंतिम रूप दे दिया है, जबकि अन्य राज्यों की कार्य योजनाएँ अंतिम रूप के अलग-अलग चरणों में हैं। 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों ने नोडल एजेंसियों को नामित कर दिया है। राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय निगरानी समितियों का गठन 21 राज्यों में किया जा चुका है।
बीस क्लस्टर स्तरीय समितियों का गठन किया गया है- पंजाब के क्लस्टर जिले व यू.पी. (दो अलग-अलग जिले) में आलू , राजस्थान में ईसबगोल, महाराष्ट्र में संतरा, अनार, अंगूर, केला (3 जिले), तमिलनाडु व केरल में केला, उत्तर प्रदेश में आम, गुजरात व यूपी में डेयरी उत्पाद, कर्नाटक में गुलाब व प्याज़, यूपी में ताजी सब्जियां, मध्य प्रदेश में संतरा और गुजरात (2 जिलों) में आलू। हितधारकों के जागरूक बनाने और आवश्यक हस्तक्षेपों पर चर्चा के लिए क्लस्टरों में दो दौर की बैठकें आयोजित की गई हैं।
इस पृष्ठभूमि में एपीडा ने एएफसी इंडिया लिमिटेड और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) जैसे संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
एपीडा के चेयरमैन श्री दिवाकर नाथ मिश्रा और एएफसी इंडिया लिमिटेड (पूर्व में कृषि वित्त निगम लिमिटेड) के प्रबंध निदेशक श्री बी गणेशन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। एएफसी इंडिया लिमिटेड को सरकारी संगठन माना जाता है। 1968 में स्थापित एएफसी इंडिया लिमिटेड, वाणिज्यिक बैंकों, नाबार्ड और एक्जिम बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाला संगठन है। यह भारत में कृषि, ग्रामीण विकास और अन्य रणनीतिक सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों के लिए परामर्श, नीति सलाहकार और कार्यान्वयन सहायता प्रदान करने वाला एक बहु-विषयक विकास संगठन है।
सहयोग के क्षेत्र
दूसरे समझौता ज्ञापन पर एपीडा के निदेशक डॉ. तरुण बजाज और एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री एन.सत्यनारायण ने हस्ताक्षर किए। एनसीयूआई, बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत है और भारत के सहकारी आंदोलन का शीर्ष संगठन है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में सहकारी आंदोलन को बढ़ावा देना और विकसित करना, सहकारी क्षेत्र के विस्तार के लिए लोगों को शिक्षित करना व मार्गदर्शन प्रदान करना एवं सहकारी सिद्धांतों के अनुसार सहकारी राय के प्रतिपादक के रूप में कार्य करना है।
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