भारतीय रिजर्व बैंक ने आज कहा कि हाल ही में घोषित मौद्रिक, विनियामक और वित्तीय नीतिगत उपायों से कोविड की दूसरी लहर से प्रभावित अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में सहायता मिलेगी। रिजर्व बैंक ने आज वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट का 23वां अंक जारी किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नीतिगत समर्थन से बैंकों की वित्तीय स्थिति को प्रोत्साहित करने में मदद मिली है।
रिपोर्ट के अनुसार अगले वर्ष मार्च में फंसे हुए ऋणों का सकल अनुपात बढकर नौ दशमलव आठ प्रतिशत होने की आशंका है। इस वर्ष मार्च में यह अनुपात सात दशमलव चार-आठ प्रतिशत था। हालांकि, बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है लेकिन विभिन्न परिस्थितियों में यह 11 दशमलव दो-दो प्रतिशत भी बढ सकता है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकों को अपनी बैलेंस शीट पर संभावित दबाव कम करने के लिए अपनी पूंजीगत और तरलता की स्थिति को मजबूत करना होगा।
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