Categories: News-Headlines

62वें एनडीसी पाठ्यक्रम के शिक्षकों और सदस्‍यों ने राष्‍ट्रपति से मुलाकात की

नेशनल डिफेंस कॉलेज (एनडीसी) के 62वें पाठ्यक्रम के शिक्षकों और सदस्यों ने आज राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

इस अवसर पर अपने संबोधन में महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि सुरक्षा एक ऐसा शब्द है, जिसका हम अक्सर अपनी बातचीत में प्रयोग करते हैं, लेकिन इसके व्यापक प्रभाव हैं। बीते दशकों में इसकी व्याख्या में काफी विस्तार हुआ है। यह पहले केवल क्षेत्रीय अखंडता तक सीमित थी, लेकिन अब इसे राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों में भी देखा जाने लगा है। इस प्रकार, “सामरिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, राजनीतिक और राष्ट्रीय रक्षा के औद्योगिक पहलुओं” का अध्ययन करने संबंधी एनडीसी पाठ्यक्रम का उद्देश्य आज और भी अधिक प्रासंगिक हो चुका है। उन्‍होंने इस बात पर प्रसन्‍नता प्रकट की कि बीते वर्षों में एनडीसी पाठ्यक्रम अपने प्रतिभागियों में इन मुद्दों के प्रति गहन समझ उत्‍पन्‍न करने के अपने उद्देश्य पर खरा उतरा है।

इस बात पर गौर करते हुए कि 62वें एनडीसी पाठ्यक्रम में सशस्त्र बलों से 62, सिविल सेवाओं से 20, मित्र देशों से 35 और कॉरपोरेट क्षेत्र से एक प्रतिभागी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि यह इस पाठ्यक्रम की अनूठी विशेषता है, जिसने अत्यधिक सराहना बटोरी है। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम के सदस्यों को विभिन्न दृष्टिकोणों को जानने का अवसर देता है, जिससे उनके विचारों और समझ के क्षितिज का विस्तार होता है।

महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि हम एक गतिशील दुनिया में निवास करते हैं, जहां एक छोटे से बदलाव का भी व्यापक प्रभाव हो सकता है। उन्‍होंने कहा कि कभी-कभी, इसके सुरक्षा संबंधी निहितार्थ भी हो सकते हैं। कोविड महामारी की गति और वेग महज उस खतरे का एक उदाहरण है, जिसका सामना आज मानवता को करना पड़ रहा है। यह हमें मानवजाति के असहाय होने का एहसास कराता है। हर खतरा हमें उससे मुकाबला करने और उसकी पुनरावृत्ति को रोकने की आवश्यकता के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। हमें न केवल पारंपरिक खतरों, बल्कि प्रकृति की अनिश्चितताओं सहित अनदेखे खतरों का भी सामना करने के लिए खुद को तैयार करने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के मुद्दे आज सर्वाधिक महत्‍वपूर्ण हैं। आज जरूरत इस बात की है कि सभी देश एक साथ आएं और उनके समाधान की दिशा में काम करें। यही वह बिंदु है, जिस पर रणनीतिक नीतियों को देशों की विदेश नीतियों के अनुरूप होना चाहिए। यह एक बहु-विषयक और बहु-आयामी दृष्टिकोण है, जिसके लिए हमें स्वयं को तैयार करने की जरूरत है।

महामहिम राष्ट्रपति ने कहा कि भारत एक राष्ट्र के रूप में, आत्मानिर्भर भारत बनने की दिशा में कदम उठा रहा है। इस विजन को साकार करने के लिए विभिन्न नीतिगत कदम उठाए जा रहे हैं। यही वह विजन है, जो भारत को विकास और प्रगति के पथ पर ले जाता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में जब स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहले विमानवाहक पोत विक्रांत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया, तो प्रत्येक भारतीय के लिए यह गर्व का क्षण था। इस तरह के कदम भारत के लोगों में नई उम्मीद और प्रेरणा का संचार करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हम प्रगति के इस पथ पर निरंतर बढ़ते रहेंगे।

Leave a Comment

Recent Posts

ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से भेंट की

ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से… Read More

1 hour ago

NHRC ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईंट भट्टों में कथित बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई की

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में… Read More

1 hour ago

FIU-IND और PFRDA ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा… Read More

18 hours ago

धन-शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और SEBI ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन-शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में… Read More

18 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की… Read More

20 hours ago

आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हराया

आईपीएल क्रिकेट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हरा… Read More

22 hours ago

This website uses cookies.