31 जनवरी 2024 तक देश के 766 जिलों में से 729 जिलों ने स्वयं को मैला ढोने की प्रथा से मुक्त घोषित किया है।
1 अक्टूबर, 2021 को लान्च किए गए स्वच्छ भारत मिशन – शहरी (एसबीएम-यू) 2.0 में सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कार्यों के मशीनीकरण के माध्यम से सीवर तथा सेप्टिक टैंकों में जोखिम भरे प्रवेश को समाप्त करने के लिए एक नया घटक अर्थात प्रयुक्त जल प्रबंधन (यूडब्ल्यूएम) शामिल किया गया है। इसके लिए 1 लाख से कम आबादी वाले शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) ने पर्याप्त संख्या में सेप्टिक टैंक कीचड़ हटाने के उपकरणों की खरीद के लिए केंद्रीय हिस्सा की निधि जारी की गई है।
मेनहोल को मशीन होल से बदलने के लिए एसबीएम-यू 2.0 के अंतर्गत मशीनीकृत डीजलजिंग/सफाई उपकरणों की खरीद, सफाई मित्रों के प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा जन जागरूकता के लिए अतिरिक्त केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। एक प्रोटोकॉल विकसित किया गया था, जिसमें खतरनाक मानवीय प्रवेश की आवश्यकता को कम करने तथा सफाईकर्मियों के हताहत होने से रोकने के लिए सीवर और सेप्टिक टैंक सफाई कार्यों के मशीनीकरण में न्यूनतम मानकों पर प्रकाश डाला गया था।
मैला ढोने वालों और सीवरों और सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई में लगे व्यक्तियों के बीच अंतर मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार का निषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 में वर्णित है जो निम्नानुसार है-
“मैला ढोने वाला” का अर्थ है किसी व्यक्ति या स्थानीय प्राधिकरण या सार्वजनिक या निजी एजेंसी द्वारा किसी अस्वच्छ शौचालय में या किसी खुली नाली या गड्ढे में मानव मल की सफाई, ढोने, निस्तारण या अन्यथा किसी भी तरीके से हैंडलिंग के लिए जिसमें अस्वच्छ शौचालयों से मानव मल का निपटान किया जाता है, लगे या नियोजित व्यक्ति, मल-मूत्र के विहित होने से पूर्व, या किसी रेलवे ट्रैक पर या ऐसे अन्य स्थानों या परिसर में, जिसे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अधिसूचित करे, या किसी रेलवे ट्रैक पर या ऐसे अन्य स्थानों या परिसर में, जिसे केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार अधिसूचित करे, मलमूत्र को इस रीति से पूर्णतः अपघटित करने से पहले और मैला ढोने की प्रथा का तदनुसार अर्थ लगाया जाएगा।
एक कर्मचारी द्वारा सीवर या सेप्टिक टैंक के संबंध में “खतरनाक सफाई” का अर्थ है ऐसे कर्मचारी द्वारा इसकी मानवीय सफाई, नियोक्ता द्वारा सुरक्षात्मक गियर तथा अन्य सफाई उपकरण प्रदान करने के अपने दायित्वों को पूरा किए बिना और सुरक्षा सावधानियों का पालन सुनिश्चित करना, जैसा कि किसी अन्य कानून में निर्धारित या प्रदान किया जा सकता है, समय के लिए लागू या उसके तहत बनाए गए नियम।
यह जानकारी आज लोकसभा में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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