रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गांधीनगर, गुजरात में 12 वीं डेफएक्सपो के अंतर्गत आयोजित ‘इन्वेस्ट फॉर डिफेंस’ निवेशक आउटरीच कार्यक्रम के दौरान घरेलू उद्योग और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) को भारतीय रक्षा क्षेत्र में निवेश तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को एकीकृत करने के अवसर का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।
घरेलू उद्योग एवं व्यवसायों की उत्साही भागीदारी पर टिप्पणी करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उद्योग के हितधारकों का विश्वास उत्साहजनक है और यह भारतीय रक्षा क्षेत्र में उनके विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए एक स्वर्णिम काल है जो आने वाले वर्षों में एक सनराइज़ सेक्टर होगा। रक्षा क्षेत्र के लिए सरकार की भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य वर्ष 2025 तक भारत में रक्षा उत्पादन को 12 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़ाकर 22 बिलियन अमरीकी डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि यह आने वाले वर्षों में उद्योग के विकास के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करता है।
राजनाथ सिंह ने पहले के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया कि आर्थिक विकास एवं सुरक्षा के बीच एक द्वंद्व है, उन्होंने कहा कि वे एक दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले कुछ वर्षों में यह दृष्टिकोण बदल गया है और अब ये दोनों अवधारणाएं एकसाथ आ चुकी हैं तथा एक दूसरे को मजबूत करती हैं। राजनाथ सिंह ने कहा, “आज राष्ट्र एकीकृत है और इन दो क्षमताओं के साथ आगे बढ़ रहा है, जो एक दूसरे की पूरक हैं, तथा दोनों क्षेत्रों में अद्वितीय सुधार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और वाणिज्य के विकास के लिए आर्थिक और रणनीतिक क्षमताएं आवश्यक हैं।
भारतीय रक्षा उद्योग की उपलब्धियों पर अपनी बात रखते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि घरेलू उद्योग ने लड़ाकू विमान, विमान वाहक, मुख्य युद्धक टैंक और अटैक हेलीकाप्टरों का निर्माण करके अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है और इन परियोजनाओं के माध्यम से एक पारिस्थितिकी बनाने का अनुभव प्राप्त किया है। उन्होंने कहा, “यह अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए रक्षा हथियारों/ प्रणालियों को सहारा देने और उनको विकसित करने में मदद करेगा।” उन्होंने डेफएक्सपो 2022 को मौजूदा और संभावित निवेशकों के लिए भारतीय रक्षा उद्योग के अभूतपूर्व विकास का हिस्सा बनने के लिए एक उत्कृष्ट मंच करार दिया।
राजनाथ सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि निवेशकों के लिए लाभ की तलाश करना स्वाभाविक है और उन्होंने निवेशकों को यह भरोसा दिलाया कि भारतीय रक्षा उद्योग में निवेश करना लाभकारी है। उन्होंने कहा कि देश में कुशल मानव संसाधन और स्वस्थ आबादी है और सरकार ने इस पहलू को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। उन्होंने उन वित्तीय उपायों के बारे में बात की जिनकी वजह से बैंक ऋण देने और पूंजी उपलब्धता बढ़ा पाने में सक्षम हुए और जिसने एक उद्यम पूंजी वित्त पोषण संस्कृति की स्थापना की है।
प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने सीएसआईआर और डीआरडीओ जैसे संगठनों के लिए लैब टू इंडस्ट्री लिंकेज में सुधार किया है और सशस्त्र बलों के लिए उत्पादों, प्रणालियों, प्रक्रियाओं में उन्नयन एवं नवाचार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आई-डीईएक्स) और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी पहल की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मानदंडों को स्वचालित मार्ग के माध्यम से 74% तक और सरकारी मार्ग के माध्यम से 100% उदार बनाया गया है और शेयर बाजारों में व्यापार पारदर्शी हो गया है जिससे रक्षा कंपनियों को भी लाभ हुआ है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का एक चौथाई हिस्सा उद्योग के नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि उद्योग को बाजार उपलब्ध कराना सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है और घरेलू उद्योग को बाजार तक पहुंच प्रदान करने के लिए काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “रक्षा क्षेत्र में घरेलू उद्योग की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए घरेलू खरीद रक्षा पूंजी अधिग्रहण का 68% आरक्षित किया है, जो लगभग 85,000 करोड़ रुपये है और इसमें से 25% घरेलू निजी उद्योग के लिए आरक्षित किया गया है।”
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि इन सभी उपायों से पिछले कुछ वर्षों में रक्षा निर्यात में वृद्धि हुई है। उन्होंने भारतीय रक्षा उद्योग के विकास की असीमित संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया और व्यवसायों को इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया।
रक्षा मंत्रालय का पहला बड़ा आयोजन ‘इन्वेस्ट फॉर डिफेंस है, जिसका लक्ष्य भारतीय उद्योग के साथ-साथ विदेशी ओईएम द्वारा देश के रक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना था। इसने सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं और रक्षा क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी के लिए सरकार द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों पर प्रकाश डाला। इसने उद्योग को इस क्षेत्र में निवेश के अवसर और लाभ प्रदान किए तथा इस प्रकार स्वदेशी उत्पादन को अधिकतम बनाने में योगदान दिया।
कार्यक्रम में उद्योग जगत के दिग्गजों और रक्षा मंत्रालय एवं सशस्त्र बलों के नेतृत्व के बीच एक पैनल चर्चा हुई। डीपीएसयू और विदेशी ओईएम सहित ओईएम के बीच एक बी2बी इंटरेक्शन भी आयोजित किया गया था। घरेलू कारोबारियों, एमएसएमई और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इसका उत्साहपूर्वक स्वागत किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय, केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी भी उपस्थित थे।
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