भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि उनकी योजना है कि सूक्ष्म ऋणों के लिए बिना किसी परिसंपत्ति को गिरवी रखे उधार देने की व्यवस्था की जाये और ये कोलैटरल-मुक्त सुविधा ना सिर्फ माइक्रो वित्त संस्थानों-एमएफआई बल्कि सभी ऋणदाताओं द्वारा उपलब्ध कराई जाये। ‘वित्तीय समावेश के पुनर्जीवन’ पर सा-धन राष्ट्रीय सम्मेलन के शुरुआती संबोधन में कल आरबीआई के डिप्टी गवर्नर राजेश्वर राव ने कहा कि वर्तमान नियमन के चलते असमानताएं पैदा हो गई हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमन प्रणाली, जो कम आय वाले परिवारों को ऋण उपलब्ध कराने और उन्हें ऋणदाताओं की ऋण वापस वसूलने के कठोर तरीकों से बचाने के लिए लाई गई थी, सिर्फ गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों पर ही लागू थी। अब तक माइक्रो फाइनेंस पोर्टफोलियो में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले अन्य ऋणदाताओं पर नियमन से जुड़े ऐसी शर्तें लागू नहीं थीं।
राजेश्वर राव ने ऋणदाताओं से सतर्क रहने के लिए कहा और ये भी कहा कि वे बड़े संस्थानों का अनुसरण न करें क्योंकि सूक्ष्म ऋण प्रणाली का एक सामाजिक उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि माइक्रो फाइनेंस के सामाजिक और कल्याणकारी उद्देश्यों की तुलना में लाभ कमाने को प्राथमिक्ता देना एक श्रेष्ठ दृष्टिकोण नहीं होगा। ऋणदाताओं को इस बात का ध्यान देना चाहिए कि उचित व्यवहार को ताक पर रख कर बैलेंस शीट में वृद्धि न की जाए।
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