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सी-डॉट ने अपना 38वां स्थापना दिवस मनाया, “आत्मानिर्भर भारत” के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई

दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने कल अपना 38वां स्थापना दिवस समारोह मनाया। इस बार भी सी-डॉट ने अपने स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में दूरसंचार और आईसीटी के नए उभरते आयामों से संबंधित समकालीन विषयों पर तकनीकी कार्यशालाओं और संगोष्ठियों का आयोजन जारी रखा। हालांकि, कोविड महामारी होने के चलते इस साल सी-डॉट ने जीबी मीमांसी व्याख्यान श्रृंखला 2021 के हिस्से के रूप में वर्चुअल तरीके से अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन में दुनिया भर के कई क्षेत्रों के विशेषज्ञों, दूरसंचार दिग्गजों और शिक्षाविदों ने भविष्य की दूरसंचार प्रौद्योगिकियों पर अपने व्यावहारिक अनुभव और गहन ज्ञान को साझा किया। तकनीकी सम्मेलन का उद्घाटन अंशु प्रकाश, अध्यक्ष, डिजिटल संचार आयोग और सचिव (दूरसंचार), भारत सरकार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में बोलते हुए अंशु प्रकाश ने इंजीनियरों को बीएसएनएल नेटवर्क में सी-डॉट 4जी एलटीई कोर के प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (पीओसी) की दिशा में सफलतापूर्वक लगातार काम करने का आह्वान किया। उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि राष्ट्र की चुनौतीपूर्ण संचार जरूरतों को पूरा करने और “आत्मनिर्भर भारत” के प्रधान मंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने के दिशा में सी-डॉट द्वारा 5जी एनएसए और एसए के स्वदेशी विकास के लिए यह एक बहुत ही उपयुक्त समय है।

दीपक चतुर्वेदी, सदस्य (सेवाएं), डिजिटल संचार आयोग, भारत सरकार ने रियल टाइम जटिल समस्याओं को हल करने, राष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत करने और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

यह कार्यक्रम डिजिटल संचार आयोग के अध्यक्ष द्वारा सी-डॉट के कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) लैब का शुभारंभ का भी गवाह बना। इस लैब में प्रभावशाली आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक चेतावनी और आपातकालीन स्थितियों में खतरे की सूचना के लिए एनडीएमए द्वारा अखिल भारतीय एकीकृत चेतावनी प्रणाली का विकास और कार्यान्वयन किया जाएगा।

तकनीकी सत्र में विभिन्न विषयों को शामिल किया गया और विभिन्न क्षेत्र विशेषज्ञों द्वारा दिलचस्प चर्चा की गई। इनमें एलियट क्रिश्चियन, आईटीयू- कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (सीएपी) पर सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा राहत में इसके प्रयोग शामिल थे। प्रोफेसर संदीप शुक्ला, आईआईटी कानपुर जिन्होंने उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल वॉलेट ढांचे के लिए स्व-संप्रभु पहचान (एसएसआई) अवधारणा पर प्रकाश डाला। अन्य विशिष्ट वक्ताओं में आईआईटी पटना से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग पर डॉ. श्रीपर्णा साहा, 5जी सिक्योरिटी पर डॉ. आशुतोष दत्ता, जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, यूएसए और आईटीयू फ्लैगशिप इनिशिएटिव कनेक्ट2रीकवर जिसमें कई एप्लिकेशनशामिल हैं पर समीर शर्मा, सीनियर एडवाइजर आईटीयू-जिनेवा ने अपने विचार प्रगट किए।

डॉ. राजकुमार उपाध्याय, कार्यकारी निदेशक, सी-डॉट और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस सम्मेलन में भाग लिया।

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