केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने घरेलू जैव ईंधन उत्पादन की जरूरत पर बल दिया और कहा कि यह जीवाश्म ईंधन के आयात में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और अंततः ये नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। वह आज नई दिल्ली में कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) पर वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (आईएफजीई) द्वारा किया गया था।
वैकल्पिक ईंधन की जरूरत पर बल देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “जीवाश्म ईंधनों की सीमित घरेलू उपलब्धता और इसमें हमारी आयात निर्भरता को देखते हुए जब तक जीवाश्म ईंधन के विकल्प/अनुपूरक का काम करने वाले वैकल्पिक ईंधनों को स्वदेशी स्थायी नवीकरणीय फीडस्टॉक के आधार पर विकसित नहीं किया जाता है तब तक इस देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर बनी रहेगी।”
मंत्री महोदय ने कहा कि सीबीजी के उत्पादन के कई फायदे होंगे। जैसे कि प्राकृतिक गैस के आयात में कमी, जीएचजी उत्सर्जन में कमी, कृषि कचरे को जलाने में कमी, किसानों को लाभकारी आय मिलना, रोजगार सृजन, प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन आदि। उन्होंने कहा, “भारत सरकार ने ऊर्जा मिश्रण में गैस की हिस्सेदारी को 2030 में 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है ताकि भारत को एक गैस आधारित अर्थव्यवस्था बनाया जा सके। वर्तमान में हम प्राकृतिक गैस की अपनी जरूरत का लगभग 50 प्रतिशत आयात कर रहे हैं। सीबीजी के तेजी से विस्तार से घरेलू संसाधनों से हमारी अतिरिक्त जरूरत पूरा करने में मदद मिलेगी।”
सरकार की नीतियों ने पिछले 10 वर्षों में हरित नवीकरणीय ऊर्जा के अडॉप्शन को सक्षम बनाया है। हरदीप सिंह पुरी ने खास तौर पर ‘किफायती परिवहन की दिशा में टिकाऊ सतत विकल्प’ (सतत) योजना और कंप्रेस्ड बायोगैस पैदा करने के लिए कृषि-कचरे के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “सतत पहल के तहत जानवरों के गोबर, कृषि कचरे, एमएसडब्ल्यू (नगर के ठोस कचरे), सीवेज के पानी और औद्योगिक कचरे जैसे प्रेस मड, चीनी उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि से निकलने वाली धुलाई जैसे विभिन्न कचरे को बायोगैस/सीबीजी के उत्पादन के लिए फीडस्टॉक के रूप में लेने पर काम किया जा रहा है।”
हरदीप सिंह पुरी ने 2024-25 तक 5,000 कमर्शियल प्लांट स्थापित करने और 15 एमएमटी सीबीजी का उत्पादन करने के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को भी साझा किया, ये सीबीजी देश में इस्तेमाल किए जा रहे अन्य गैस ईंधनों की जगह लेगा। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने सतत योजना के तहत 46 कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र चालू किए हैं और वर्तमान में देश भर में 100 आउटलेट हैं जो कंप्रेस्ड बायोगैस का वितरण कर रहे हैं।
इस इकोसिस्टम के बारे में बात करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार ‘ट्रिपल बॉटम लाइन’ (पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था) के सभी कारकों के लिए स्थिरता को प्रोत्साहित करने हेतु एक अनुकूल इकोसिस्टम विकसित करने में लगातार लगी हुई है। यह दिखलाता है कि सरकार ने किस तरह नीतियां तैयार की हैं, केंद्रीय वित्तीय सहायता के जरिए समर्थन देने वाली योजनाएं बनाई हैं ताकि हरित ऊर्जा के हर प्रकार को अपनाने में समर्थन दिया जा सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि सरकार नियमों को और सरल बनाने के लिए अन्य विभागों और मंत्रालयों के साथ काम कर रही है, जिसके नतीजतन इन परियोजनाओं को अपनाने और लागू करने में आसानी होगी। उन्होंने उर्वरक विभाग का जिक्र किया, जिसने एक “बास्केट अप्रोच” के तौर पर रासायनिक उर्वरकों के साथ एफओएम के भी अनिवार्य उठाव के लिए उर्वरक कंपनियों को पत्र जारी किया और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने केस-टू-केस आधार पर संयंत्रों को ‘वाइट कैटेगरी’ के दर्जे में शामिल किया।
हरित और स्वच्छ ऊर्जा के महत्व को बताते हुए मंत्री महोदय ने ऐसे नवीकरणीय, टिकाऊ और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया जो अल्पावधि में दूसरे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के पूरक बन सकते हैं और लंबी अवधि में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे सीबीजी मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया के एक उप-उत्पाद, किण्वित जैविक खाद (एफओएम) को कृषि क्षेत्र में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने और कृत्रिम उर्वरकों के उपयोग को कम करने के लिए लागू किया जा सकता है।
इन परियोजनाओं के वित्तपोषण के बारे में बात करते हुए उन्होंने संकेत दिया कि अमृत काल बजट 2023 भारत की बायो-गैस और स्वच्छ ऊर्जा क्रांति को भारी बढ़ावा देता है:
सीबीजी परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने और गोबरधन योजना के तहत 200 सीबीजी परियोजनाओं की स्थापना की घोषणा के साथ,
नेचुरल और बायो गैस की मार्केटिंग करने वाले सभी संगठनों के लिए पांच प्रतिशत सीबीजी का प्रावधान लाया जाएगा।
ब्लेंडेड कंप्रेस्ड नेचुरल गैस पर टैक्स गिरावट से बचने के लिए, ब्लेंडेड सीएनजी में शामिल कंप्रेस्ड बायोगैस पर चुकाई गई जीएसटी राशि पर एक्साइज ड्यूटी से छूट दी गई है।
सरकार के समावेशी विकास दृष्टिकोण पर जोर देते हुए मंत्री महोदय ने कहा कि कृषि और किसान इसका अभिन्न अंग हैं। ग्रामीण भारत में व्यापक तौर पर पाए जाने वाले कृषि और पशु कचरे के उपयोग के जरिए हरित ऊर्जा, विशेष रूप से कंप्रेस्ड बायोगैस की ज्यादा से ज्यादा पैठ के माध्यम से वे सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने विभिन्न राज्यों और हरित ऊर्जा व खासकर कंप्रेस्ड बायोगैस को अपनाने को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका की सराहना की और कंप्रेस्ड बायोगैस को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाने के लिए उन्हें बधाई दी, जो कि लंबी अवधि में देश की एनर्जी बास्केट को बढ़ावा देने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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