प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश भर के ग्रामीण क्षेत्र के हर घर में नल के पानी का कनेक्शन देने की व्यवस्था करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, जिसके लिए अगस्त 2019 से राज्यों के साथ साझेदारी में जल जीवन मिशन लागू किया जा रहा है। भारत सरकार ने मणिपुर में जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए राज्य को 120 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान दिया है। जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन को लेकर राज्य को 2021-22 के लिए 481 करोड़ रुपये का केंद्रीय कोष आवंटित किया गया जो 2020-21 के दौरान दिए गए फंड का लगभग चार गुना ज्यादा है।
मणिपुर की योजना है कि सितंबर 2022 तक राज्य के हर ग्रामीण घर में नल के पानी की आपूर्ति का प्रावधान किया जाए। अब तक राज्य के 4.51 लाख ग्रामीण परिवारों में से 2.67 लाख (59.2%) घरों में नल के पानी का कनेक्शन है। 2019 में जल जीवन मिशन की घोषणा के बाद से अब तक लगभग 2.41 लाख घरों को नल का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। 2021-22 में 2.26 लाख ग्रामीण परिवारों को नल के पानी का कनेक्शन देने की योजना पर मणिपुर काम कर रहा है।
इसके अलावा 2021-22 में 15वें वित्त आयोग के अनुदान के रूप में मणिपुर को ग्रामीण स्थानीय निकायों पीआरआई को पानी और स्वच्छता के लिए 78 करोड़ रुपये आवंटित किए गए और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए अगले पांच वर्षों यानी 2025-26 तक 414 करोड़ रुपये का फंड सुनिश्चित किया गया है। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि ग्रामीण घरों में पानी की आपूर्ति में धन की कमी न हो। इस विशाल निवेश से मणिपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। इससे गांवों में आय सृजन के अवसर पैदा होंगे।
जल जीवन मिशन को “नीचे से ऊपर” दृष्टिकोण के बाद साथ स्थानीय प्रबंधन के हिसाब से कार्यान्वित किया जाता है, जिसमें योजना से लेकर कार्यान्वयन और प्रबंधन के संचालन और रखरखाव में स्थानीय ग्राम समुदाय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।इसके लिए राज्य ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति वीडब्ल्यूएससी/पानी समिति को मजबूत करने और 5 वर्षीय ग्राम कार्य योजना विकसित करने जैसी गतिविधियों का संचालन करता है। साथ ही ग्राम कार्य योजना को विकसित करने के साथ-साथ ग्राम सभा में इसे मंजूरी देने जैसी कई गतिविधियां चलाता है। जिसमें समुदाय उनके लिए लागू की जाने वाली जलापूर्ति योजनाओं पर विचार-विमर्श करता है। यह कार्यक्रम महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है, क्योंकि वे ही किसी भी घर में पानी लाने की प्राथमिक रूप से जल का प्रबंधन करती हैं।
मिशन के बारे में लोगों में जागरूकता पैदा करने और उन्हें सुरक्षित पानी के महत्व के बारे में संवेदनशील बनाने, समुदाय के साथ जुड़ने और समर्थन देने के साथ ही वीडब्ल्यूएससी या पानी समितियों को सहायता देने के लिए राज्य द्वारा स्वयंसेवी संगठनों, स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों आदि को कार्यान्वयन सहायता एजेंसियों (आईएसए) के रूप में लगाया गया है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए देश में 2000 से अधिक जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं आम लोगों के लिए खोली गई हैं, ताकि वे जब चाहें नाममात्र की कीमत पर अपने पानी के नमूनों की जांच करवा सकें। मणिपुर में 13 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं।
सभी विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्रों में नल से जल, मध्यान्ह भोजन पकाने, हाथ धोने व शौचालयों में उपयोग के लिए नल के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक मणिपुर के 3,265 स्कूलों (94.5%) और 7,591 (95.2%) आंगनबाड़ी केंद्रों में नल के पानी की आपूर्ति की गई है। राज्य जल्द से जल्द इन संस्थानों में पाइप से जलापूर्ति की व्यवस्था करेगा।
अगस्त 2019 में मिशन की शुरुआत के समय में देश के कुल 18.93 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.23 करोड़ (17%) घरों में नल के पानी की आपूर्ति थी। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की चुनौतियों के बावजूद 5.39 करोड़ (28%) से अधिक परिवारों को मिशन की शुरुआत के बाद से नल के पानी की आपूर्ति प्रदान की गई है। वर्तमान में 8.63 करोड़ (45%) ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल के माध्यम से पीने योग्य पानी मिलता है। गोवा, तेलंगाना, हरियाणा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के साथ ही पुड्डुचेरी में हर ग्रामीण परिवार को उनके घरों में नल का पानी मिल रहा है।
प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की परिकल्पना के बाद मिशन का आदर्श वाक्य है कि कोई भी छूटने न पाए और हर ग्रामीण परिवार को नल के पानी का कनेक्शन मिलना चाहिए। वर्तमान में 83 जिले और 1.27 लाख से अधिक गांवों में प्रत्येक घर में नल से पानी की आपूर्ति हो रही है।
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