Categories: News-Headlines

सरकार ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में कदम बढ़ाते हुए आईईपीएफए की दावा निपटान प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया

भारत सरकार के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मिशन और विजन की दिशा में एक प्रमुख कदम उठाते हुए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने (एमसीए) ने निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण निधि प्राधिकरण (लेखा, लेखा परीक्षा, स्थानांतरण और रिफंड) नियमावली, 2016 के तहत विभिन्न जरूरतों को युक्तिपूर्ण बनाकर दावा निपटान प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया है।

दावादारों के लिए अग्रिम रसीद की आवश्यकता को समाप्‍त कर दिया गया है। वस्‍तुगत और डिमेट शेयरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र/ वसीयत के मूल लेख/ वसीयत की जरूरत में 5,00,000 रुपये (पांच लाख) तक छूट दी गई है, दस्तावेजों के नोटरीकरण के स्‍थान पर स्वयं सत्यापन कर दिया गया है और शपथ पत्र और जमानत की जरूरतों को अपेक्षाकृत रूप से आसान बना दिया गया है।

कंपनियों के लिए दावा न किए गए उचिन्‍त (सस्पेंस) खाते से संबंधित दस्तावेज को संलग्न करने की जरूरत को सरल बना दिया गया है और कंपनियों को अपनी आंतरिक अनुमोदित प्रक्रियाओं के अनुसार ट्रांसमिशन दस्‍तावेज यानी उत्तराधिकार, प्रमाण पत्र, वसीयत आदि के मूल लेख/ वसीयत को स्‍वीकार करने में छूट दी गई है और वस्‍तुगत शेयर प्रमाणपत्र के नुकसान के लिए समाचार पत्र में विज्ञापन देने की अनिवार्यता में 5,00,000 रुपये तक की राशि की छूट दी गई है।

इस परिवर्तन के द्वारा दावादारों के लिए प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने पर ध्‍यान केन्द्रित किया गया है। नई व्यवस्था में तेजी से नागरिक केन्द्रित सेवाएं और काम में लगने वाले समय में तेजी लाने के लिए विश्वास-आधारित मॉडल की परिकल्पना की गई है। अब यह उम्मीद की जाती है कि इन परिवर्तनों से अनेक दावेदार निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) से अपने शेयरों और राशियों का दावा करने के लिए आगे आएंगे। अब तक आईईपीएफए ने 20,000 से अधिक दावों को मंजूरी दी है और 1.29 करोड़ से अधिक शेयरों की राशि रिफंड की है। 1,011 करोड़ रुपये से अधिक बाजार मूल्य के शेयर और लाभांश तथा 20 करोड़ रुपये से अधिक अन्‍य राशि रिफंड की गई है।

आईईपीएफए ​​के बारे में कुछ जानकारी

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 125 (3) के अनुसार आईईपीएफ निधि के प्रबंधन के लिए कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 125 के तहत निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की स्थापना की गई। इस प्राधिकरण के मुख्य उद्देश्यों में निवेशक शिक्षा को बढ़ावा देना, जागरूकता एवं संरक्षण, दावा न किए गए शेयरों, लाभांश और अन्य राशियों को कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 124 और 125 के तहत सही दावेदारों को वापस करना शामिल है। आईईपीएफए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।

Leave a Comment

Recent Posts

कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों के कारण चर्चा के केंद्र में हैं।

शशि थरूर फिर चर्चा में, बयान और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर कांग्रेस के वरिष्ठ… Read More

15 hours ago

RUHS CUET 2026 के नतीजे घोषित, उम्मीदवार अब स्कोरकार्ड और मेरिट लिस्ट देखकर एडमिशन प्रक्रिया की तैयारी कर सकते हैं।

RUHS CUET 2026 Result जारी, उम्मीदवारों का इंतजार खत्म राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS)… Read More

15 hours ago

This website uses cookies.