सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगाए गए कर को खत्म करने के साथ ही बुधवार को डीजल एवं विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लागू अप्रत्याशित लाभ कर में कटौती की घोषणा की। इसके अलावा घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर लगाए गए कर से भी राहत दी गई।
सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर की दर से लागू निर्यात शुल्क को खत्म कर दिया गया है। वहीं डीजल एवं एटीएफ के निर्यात पर लगने वाले कर में दो-दो रुपये की कटौती कर क्रमशः 11 रुपये एवं चार रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर लगने वाले कर को भी 23,250 रुपये प्रति टन से घटाकर 17,000 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। इस कदम से ओएनजीसी और वेदांता लिमिटेड जैसे घरेलू तेल उत्पादकों को फायदा होगा।
इसके अलावा सरकार ने निर्यात-केंद्रित एसईजेड में स्थित रिफाइनरियों से विदेश भेजे जाने वाले उत्पादों को भी इस शुल्क से राहत देने की घोषणा की। पहले सरकार ने निर्यात-केंद्रित एसईजेड में स्थित रिफाइनरी को कर दायरे में रखा था।
इस घोषणा से रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को फायदा पहुंचने की उम्मीद है। इसका असर बाजार पर भी दिखा और कंपनी के शेयर दोपहर के सत्र में 2.7 प्रतिशत तक चढ़ गए। इसी तरह ओएनजीसी और वेदांता के शेयरों में भी क्रमशः 4.63 प्रतिशत और 8.36 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।
पीटीआई-भाषा ने गत 13 जून को ही बताया था कि पिछले कुछ दिनों में वैश्विक तेल की कीमतों में तेज गिरावट होने के बाद अप्रत्याशित लाभ पर लगाए गए कर की समीक्षा की जा सकती है।
सरकार ने तेल कारोबार से जुड़ी कंपनियों को होने वाले अप्रत्याशित लाभ पर गत एक जुलाई से कर लगा दिया था। लेकिन उसके कुछ दिनों के बाद ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आई है। इससे तेल उत्पादकों और रिफाइनरी कंपनियों दोनों के ही लाभ मार्जिन पर असर पड़ा है।
वैश्विक मंदी आने की चिंताएं गहराने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। मंदी की स्थिति में मांग घटने की आशंका हावी होने से डीजल, पेट्रोल और एटीएफ पर कंपनियों के मार्जिन पर काफी असर पड़ा है।
गत एक जुलाई को पेट्रोल एवं एटीएफ पर छह रुपये प्रति लीटर निर्यात शुल्क का प्रभावी असर 12 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर शुल्क 26 डॉलर प्रति बैरल के बराबर था। घरेलू स्तर पर निकले कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का अप्रत्याशित लाभ कर 40 डॉलर प्रति बैरल के बराबर था।
अप्रत्याशित लाभ पर कर लगने के बाद डीजल एवं पेट्रोल के मामले में कीमत वसूली घाटे के करीबी स्तर तक पहुंच गयी जबकि एटीएफ और घरेलू कच्चे तेल की भी कीमत वसूली 15 साल के औसत से नीचे चली गई।
बीते दो-तीन हफ्तों में कच्चे तेल के मानक ब्रेंट क्रूड का अंतरराष्ट्रीय भाव 15-20 डॉलर प्रति बैरल तक कम हो चुका है। इस समय यह 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है।
जब सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर कर लगाने की घोषणा की थी तो उससे साल भर में करीब एक लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया था। अकेले कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन पर लगे अप्रत्याशित लाभ कर से ही 65,600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान जताया गया था।
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