संसद की कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी स्थायी समिति, समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर आज बैठक करेगी। समिति के प्रमुख और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बताया कि पैनल इस मामले पर हितधारकों से उनकी राय मांगेगा। उन्होंने कहा कि समिति की बैठक गैर-राजनीतिक है और इसमें सभी राजनीतिक दलों के सदस्य हैं। यूसीसी में भारत में नागरिकों के लिए एक समान कानून को बनाने और लागू करने का एक प्रस्ताव है जो सभी नागरिकों पर उनके धर्म, लिंग, और यौन अभिरुचि की परवाह किए बिना समान रूप से लागू होंगे।
इस बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि समान नागरिक संहिता पर कई पार्टियां बीजेपी का समर्थन करेंगी। पीयूष गोयल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अलग-अलग फैसलों में यूसीसी लाने की बात कही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 से पहले कांग्रेस सिर्फ तुष्टिकरण की राजनीति को प्राथमिकता देती थी और समाज को बांटकर रखती थी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के मुताबिक, ‘राज्य भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा। संविधान में निदेशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 44 का उद्देश्य कमजोर समूहों के खिलाफ भेदभाव को दूर करना और देश भर में विविध सांस्कृतिक समूहों में सामंजस्य स्थापित करना है। संहिता भारत के लिए एक कानून बनाने का आह्वान करती है, जो विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने जैसे मामलों में सभी धार्मिक समुदायों पर लागू होगा। वर्तमान में, विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानून उनके धार्मिक ग्रंथों द्वारा शासित होते हैं।
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