संसद ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024’ पारित कर दिया है। राज्यसभा ने आज इसे स्वीकृति दी। विधेयक पर चर्चा के उत्तर में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने युवाओं को जो प्राथमिकता दी है वह पिछली सरकारों के दौरान नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता के साथ कई युवा केंद्रित सुधार किए हैं। इनमें राजपत्रित अधिकारियों द्वारा सत्यापन को समाप्त करना, विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में साक्षात्कार को समाप्त करना और रोजगार मेले शुरू करना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश के युवाओं पर भरोसा है।
सार्वजनिक परीक्षाओं में संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी और केंद्र सरकार के विभागों की परीक्षाएं सम्मिलित हैं। इस विधेयक का उद्देश्य किसी भी अनुचित तरीके से लिप्तता या साजिश पर रोक लगाना है। अनुचित साधनों में प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी की अनधिकृत पहुंच या लीक होना, सार्वजनिक परीक्षा में परीक्षार्थी की सहायता करना, कंप्यूटर नेटवर्क के साथ छेड़छाड़ करना, फर्जी परीक्षा आयोजित करना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना सम्मिलित है। विधेयक में अपराध करने पर तीन से दस वर्ष का कारावास और दस लाख से एक करोड़ रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान है।
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