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संसद के दोनों सदन आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

संसद के दोनों सदन आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिए गए। बजट सत्र का दूसरा भाग 13 मार्च से आरंभ हुआ था। इस दौरान अडाणी समूह के मुद्दे और भारतीय लोकतंत्र पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी पर लोकसभा और राज्यसभा में निरंतर गतिरोध बना रहा। इस बीच, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गतिरोध के कारण दोनों सदनों में केंद्रीय बजट और अन्य विधेयकों पर चर्चा नहीं हो सकी और शोर शराबे के बीच ही उन्हें पारित किया गया।

आज सुबह जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बजट सत्र के दौरान कामकाज का उल्लेख करते हुए समापन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि सदन में आठ विधेयक प्रस्तुत किए गए, जिनमें से छह पारित हो गए। ओम बिरला ने सदन में निरंतर व्यवधान पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस दौरान जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह देश के लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। उन्होंने सदन में पर्चे दिखाने और नियोजित व्यवधान पर भी आपत्ति प्रकट की। उन्होंने कहा कि सदन बहस और चर्चा के लिए है इसलिए ऐसा आचरण न्यायोचित नहीं है। अध्यक्ष के भाषण के दौरान कांग्रेस, डीएमके और अन्य दलों के सदस्य अडाणी समूह के मुद्दे की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने की मांग के नारे लगाते हुए सदन के बीचोबीच आ गए। जनता दल यूनाइटेड, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों के सदस्य भी खड़े थे।

राज्यसभा में पहले स्थगन के बाद जब दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो डीएमके सदस्य तिरुचि सिवा ने सदन के नेता पीयूष गोयल के बयान पर सभापति जगदीप धनखड़ की व्यवस्था पर प्रश्न उठाया। पीयूष गोयल ने भारतीय लोकतंत्र पर कांग्रेस नेता की टिप्पणी का जिक्र किया था। सभापति ने विशेषाधिकार समिति की सिफारिश मिलने तक कांग्रेस सांसद रजनी अशोकराव पाटिल का निलम्बन जारी रखने की सिफारिश की। कांग्रेस सांसद को राज्यसभा की कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग करने के कारण बजट सत्र से निलंबित किया गया है। सभापति ने समापन भाषण में कहा कि सदन को व्यवधान के बजाए विभिन्न विषयों पर योगदान करना चाहिए। उन्होंने बजट सत्र के दूसरे भाग के दौरान सदन की अत्यधिक कम उत्पादकता पर चिंता प्रकट की। इस अवधि के दौरान केवल 6 दशमलव चार प्रतिशत ही कामकाज हुआ। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में व्यवधान के कारण एक सौ तीन घंटे तीस मिनट बर्बाद हुए और कुल उत्पादकता केवल 24 दशमलव चार प्रतिशत रही। जगदीप धनखड़ ने सदस्यों से सदन में निराशाजनक कामकाज पर विचार करने और इस समस्या को दूर करने का रास्ता तलाशने को कहा। सभापति के भाषण के दौरान कांग्रेस सदस्य सदन के बीचोंबीच आकर नारेबाजी करते रहे।

इससे पहले, सुबह के समय कांग्रेस, डीएमके और अन्य सहित विपक्ष के सदस्यों ने अडाणी समूह के मुद्दे की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराने की मांग उठाई। राजद, वामदल, टीएमसी, एनसीपी और अन्य दलों के सदस्य भी खड़े होकर शोर शराबा करते रहे। सत्तारूढ़ दलों के सदस्यों ने भी मांग दोहराई कि लोकतंत्र पर टिप्पणी के कारण राहुल गांधी को माफी मांगनी चाहिए। शोरशराबे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी।

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