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संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटरशोम्बी शार्प ने बांग्लादेश और अरुणाचल प्रदेश के सिविल सेवकों के 57वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम के संयुक्त समापन सत्र को संबोधित किया

संयुक्त राष्ट्र ने गरीबी नहीं, भुखमरी नहीं, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ जल एवं स्वच्छता जैसे कई सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को रेखांकित करने के लिए भारत के जी-20 अध्यक्षता की सराहना की।

संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर, शोम्बी शार्प ने बांग्लादेश और अरूणाचल प्रदेश के लोक सेवकों के 57वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम के संयुक्त समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि वास्तव में भारत की जी-20 अध्यक्षता एसडीजी-20 की अध्यक्षता बन गई है, क्योंकि भारत वित्तीय अंतराल को समाप्त करने के लिए जोरदार आवाज उठा रहा है।

शोम्बी शार्प ने कहा कि लंबे अंतराल के बाद इंडोनेशिया, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसी विश्व की चार उभरती अर्थव्यवस्थाएं विकासशील देशों के मुद्दों को उठाने और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनने के लिए जी-20 की अध्यक्षता क्रमिक रूप से संभालेंगी। उन्होंने कहा कि भारत के जी-20 अध्यक्षता के बाद इस वर्ष सितंबर में दो सप्ताह बाद न्यूयॉर्क में एसडीजी शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसडीजी-17 लक्ष्यों की मध्यावधि समीक्षा करने के लिए यह सम्मेलन बहुत महत्वपूर्ण होगा।

उल्लेखनीय है कि 2015 में संयुक्त राष्ट्र के 192 सदस्य देशों ने 2030 एजेंडा के एक भाग के रूप में 17 सतत विकास लक्ष्यों को अपनाया था। इनमें से कुछ लक्ष्य गरीबी नहीं, भूख नहीं, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, स्वच्छ पानी एवं स्वच्छता, सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा, मर्यादित काम एवं आर्थिक विकास, उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना हैं।

शोम्बी शार्प ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र भारत के हरित अवस्थांतर का समर्थन करता है क्योंकि उसने 2070 तक शून्य कार्बन के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल रूपांतरण, कम कार्बन वाले आर्थिक मॉडल और लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाला शासन, भारत के उच्च विकास मॉडल की कुछ प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं।

शोम्बी शार्प ने रेखांकित किया कि दुनिया ईंधन, भोजन और उर्वरक जैसे कई संकटों का सामना कर रही है और सबसे गरीब देशों, विशेष रूप से दक्षिण एशिया में सबसे गरीब समुदाय इस प्रकार के संकटों का सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।

बांग्लादेश और अरूणाचल प्रदेश के लोक सेवकों को संबोधित करते हुए, शोम्बी शार्प ने कहा कि सामान्य और गरीब आदमी को निश्चित और कुशल सेवाएं प्रदान करना किसी भी सेवा का सार और लोकाचार है।

राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के महानिदेशक, भरत लाल ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी सिविल सेवा का अंतिम लक्ष्य आम लोगों के जीवन की गुणवत्ता में बदलाव होना चाहिए। उन्होंने बांग्लादेश और अरूणाचल प्रदेश के सिविल सेवकों से आग्रह किया कि अगर वे एनसीजीजी से प्राप्त कुछ कौशलों या सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को लागू करने में सक्षम होंगे, तो इससे शासन में महत्वपूर्ण परिवर्तन आएगा।

भरत लाल ने कुशल लोक सेवा प्रदान करने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया और अवसंरचना, सेवाओं और सुविधाओं में सुधार करते हुए नागरिकों के लिए अपनी क्षमता की पहचान करने के लिए एक सक्षम वातावरण का निर्माण करने के महत्व पर प्रकाश डाला। महानिदेशक ने अधिकारियों से अपने अनुभवों और शिक्षाओं को साझा करने का आग्रह किया, जिन्हें लोगों की भलाई के लिए अन्य अधिकारियों द्वारा और बेहतर बनाया जा सकता है और अन्य क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है।

भरत लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सार्वजनिक सेवा प्रदान करने और नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की दिशा में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि सुशासन के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को सुदृढ़ बनाने के लिए, जो पारदर्शिता, जवाबदेही और समावेशिता पर केंद्रित है, एनसीजीजी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा समर्थित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ दर्शन के अनुरूप भारत और पड़ोसी देशों में सिविल सेवकों के बीच सहयोग और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी), मसूरी परिसर में 28 फरवरी को शुरू हुए बांग्लादेश (40 प्रतिभागियों के साथ 57वां बैच) और अरुणाचल प्रदेश (29 प्रतिभागियों के साथ दूसरा बैच) के सिविल सेवकों के लिए दो क्षमता निर्माण कार्यक्रम आज प्रतिभागियों के बीच प्रमाणपत्र का वितरण के साथ समाप्त हुआ। एनसीजीजी ने ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए इस संयुक्त सत्र का आयोजन किया। सिविल सेवकों के लिए एनसीजीजी की क्षमता निर्माण पहल का उद्देश्य सुशासन को बढ़ावा देना, सेवा वितरण को बढ़ाना और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचते हुए नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

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