भारत और अमेरिका के विशेषज्ञों ने संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं के लिए उन सर्वश्रेष्ठ योजनाओं को शुरू करने को लेकर बातचीत की, जिन्हें डीएसटी-एनएसएफ संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाओं किक-ऑफ कार्यशाला में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) के माध्यम से लागू किया जाएगा।
इस कार्यशाला का आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की सहभागिता में आईआईटी- दिल्ली ने किया। इसका उद्देश्य इस विषय पर चर्चा करना था कि एनएसएफ- समर्थित संस्थानों के साथ सहयोगी अनुसंधान और विकास के लिए एनएम-आईसीपीएस के तहत चिह्नित छह टीआईएच द्वारा परियोजनाओं को कैसे कार्यान्वित किया जाना है, जो अद्वितीय संसाधनों का लाभ उठाएंगे। इनमें भारत और अमेरिका में उपलब्ध टेस्ट बेड व डेटासेट, एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) व उन्नत वायरलेस जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों पर सहयोग का विस्तार करनाऔर छात्र व शोधकर्ता विनिमय कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना शामिल हैं।
डीएसटी के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता ने बताया कि कुल 35 संयुक्त परियोजनाओं की पहचान की गई है,जिन्हें अमेरिका के प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) और अनुसंधान संस्थानें लागू करेंगी। उन्होंने कहा, “इस प्रयास से हमें सीपीएस के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।”
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा, “अमेरिका हमारा स्वाभाविक साझेदार है। विशेष रूप से विज्ञान में हमने पारंपरिक रूप से भागीदारी की है और सहयोगी परियोजनाओं के माध्यम से संस्था स्तर, सरकारी स्तर और यहां तक कि लोगों के स्तर पर भी जुड़ाव और अधिक गहरा होगा।”
एनएम-आईसीपीएस के तहत छह टीआईएच की पहचान एनएसएफ समर्थित संस्थानों के साथ सहयोगात्मक अनुसंधान और विकास के लिए की गई है।इन परियोजनाओं का उद्देश्य दोनों देशों में मौजूदा अनुसंधान परियोजनाओं में अंतरराष्ट्रीय सहभागिता के घटक को जोड़ना है। यह केंद्र राष्ट्रीय अंतर-विषयक साइबर- फिजिकल प्रणालियों के मिशन के तहत डीएसटी द्वारा लगभग 43करोड़ डॉलर के निवेश के पांच साल के खंड का हिस्सा हैं और इसमें अकादमिक शोधकर्ता व उद्योग भागीदार शामिल हैं।
एनएसएफ के निदेशक डॉ. सेथुरमन पंचनाथन ने कहा, ““अमेरिका सभी के लिए समृद्धि और अवसर को लेकर भारत के साथ साझेदारी करने के लिए प्रतिबद्ध और गौरवान्वित है। ये परियोजनाएं आकांक्षी होंगी और सामाजिक समस्याओं का समाधान करसकती हैं।”
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान- दिल्ली (आईआईटी दिल्ली) के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि यह कार्यशाला समाज की समस्याओं के समाधान के लिए लिंकेज को सक्षम करेगी और टीआईएच का निर्माण करेगी।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और नेशनल साइन्स फाउंडेशन (एनएसएफ) ने सितंबर 2021 में विषयगत क्षेत्रों में सहयोगी अनुसंधान और विकास के लिए आपस में हाथ मिलाया। इन क्षेत्रों में कृषि, स्वायत्त तकनीक प्रणाली व अनुप्रयोगों, स्वास्थ्य व पर्यावरण, पुनर्वास व सहायक रोबोटिक्सऔर विभिन्न साइबर-फिजिकल प्रणालियों को कवर करने वाले स्मार्ट शहर शामिल हैं।
डीएसटी नए युग की तकनीकों में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए पांच साल की अवधि के लिए 3,660 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ राष्ट्रीय मिशन-अंतर-विषयक साइबर-फिजिकल प्रणालियों (एनएमआईसीपीएस) को कार्यान्वित कर रहा है।इस मिशन के कार्यान्वयन के तहतदेश भर के प्रतिष्ठित संस्थानों में 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) स्थापित किए गए हैं। इसका उद्देश्य उन्नत प्रौद्योगिकी मेंसाइबर-फिजिकल प्रणालियों, नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं/नवप्रवर्तकों, प्रमुख संस्थानों, स्टार्ट-अप्स, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योगों और वैश्विक जुड़ाव को लेकर मंच का नेतृत्व करने के लिएएक मजबूत नींव और एक सुगम इकोसिस्टम का निर्माण करना है।
इस कार्यशाला में डीएसटी के अंतरराष्ट्रीय निगम के प्रमुख संजीव के वार्ष्णेय, एफएफटी प्रभाग की प्रमुख डॉ. एकता कपूर, डीएसटी के वैज्ञानिक डॉ. जेबीवी रेड्डी, ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल साइन्स एंड इंजीनियरिंग के प्रमुख डॉ. केंद्रा शार्प, ऑफिस ऑफ इंटरनेशनल साइन्स एंड इंजीनियरिंग के कार्यक्रम निदेशक डॉ. ब्रिजेट तुरगा, कंप्यूटर और नेटवर्क सिस्टम प्रभाग के निदेशक डॉ. गुरदीप सिंह के साथ टीआईएच और अमेरिकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
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