विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने आज कहा कि पिछले वर्ष भूकंप से प्रभावित नेपाल के जिले में मूलभूत संरचना पुनर्निर्माण के लिए भारत 50 मिलियन डॉलर की एक वित्तीय सहायता देगा।
नेपाल में 2015 के भूकंप के बाद काठमांडू में चल रही अन्य पुनर्निर्माण परियोजनाओं और त्रिभुवन विश्वविद्यालय केन्द्रीय पुस्तकालय का विदेश मंत्री एन. पी. सउद के साथ संयुक्त रूप से उद्घाटन करने के बाद डॉ. जयशंकर ने यह बात कही। विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर महीने में नेपाल के पश्चिमी हिस्सों में आये भूकंप से हुई जान-माल की बर्बादी से भारत दुखी है।
पिछले वर्ष तीन नवंबर को नेपाल के जाजरकोट जिले में पांच दशमलव सात तीव्रता के भूकंप के तीव्र झटके आये। इस भूकंप में एक सौ पचास से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई और लगभग चार सौ लोग घायल हो गये। 2015 के बाद यह नेपाल का सबसे घातक भूकंप था।
डॉ जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के लोगों और यहां के नेतृत्व के साथ एकजुटता की भावना दिखाई है और हर संभव सहायता प्रदान करने के प्रति वचनबद्ध हैं।
द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में हुए महत्वपूर्ण प्रयासों से भारत-नेपाल के संबंधों में वास्तविक बदलाव हुआ है। दोनों देशों ने बिजली क्षेत्र में सहयोग और परियोजना कार्यान्वयन के क्षेत्रों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अपने पडोस विशेषकर नेपाल के साथ अपने संबंधों को पुन: परिभाषित करने के प्रति वचनबद्ध है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि उनकी नेपाल यात्रा सफल है। विदेश मंत्री कल दो दिवसीय यात्रा पर नेपाल पहुंचे।
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