विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा है कि पश्चिमी मोर्चे पर, सीमापार आतंकवाद की लंबे समय से चली आ रही चुनौती पर अब और अधिक मजबूती से जवाब देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उरी और बालाकोट की घटनाओं का उचित जवाब दिया गया। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत और विश्व विषय पर पंडित हृदय नाथ कुंजरू स्मारक व्याख्यान 2024 को संबोधित करते हुए, डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत, दबाव और व्यवधान के नए साधनों से मजबूत किए गए सीमा पार आतंकवाद का जवाब, दृढ़ संकल्प और धैर्य के साथ देता है।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने मजबूत इरादे और धैर्य के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में कदम बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जब भारत को कोविड के बीच चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चुनौती दी गई तो त्वरित और प्रभावी जवाबी ही इससे निपटने का उचित उपाय था। उन्होंने कहा कि सीमा पर बुनियादी ढांचे की लंबे समय से हो रही उपेक्षा को दूर करने के लिए राष्ट्र की रक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया गया है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत के आर्थिक, विकासात्मक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में कई प्रतीक प्रयोग हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से, भारत स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है और यह भी वास्तविकता है कि भारत दुनिया के साथ जुड़ता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह दूसरों द्वारा निर्धारित शर्तों पर ऐसा करे। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का मतलब केवल राष्ट्रीय राजनीति के अलावा एक सभ्य देश होना भी है।
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