विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सीमा मुद्दों के बारे में भारत के साथ किए गए समझौतों का पालन न करने पर चीन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दो पड़ौसी देशों के बीच तनाव का कारण यही रवैया है। सोमवार को ऑस्ट्रिया के राष्ट्रीय ब्राडकास्टर ओआरएफ के साथ साक्षात्कार में डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत का चीन के साथ जो समझौता है उसके अंतर्गत सीमाओं पर सेना का जमावड़ा नहीं होना चाहिए, लेकिन चीन ने इन समझौतों का पालन नहीं किया और वास्तविक नियंत्रण रेखा को एक-तरफा तौर पर बदलने की कोशिश की। चीन की ओर से यथा स्थिति को बदलने की कोशिश पर विदेश मंत्री ने कहा कि चीन इस बारे में भारत पर आरोप लगा सकता है, हालांकि उपग्रह की तस्वीरों से साफ पता चलता है कि गलती किसकी है।
इन समस्याओं के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच अब तक 17 दौर की बातचीत हो चुकी है।
एस. जयशंकर ने कहा कि इस वर्ष भारत की आबादी संभवत: चीन से बढ़कर विश्व का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्री ने खेद व्यक्त किया कि दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है।
साक्षात्कार के दौरान पाकिस्तान पर परोक्ष हमला करते हुए विदेश मंत्री ने इसे आतंकवाद का केन्द्र-बिन्दु बताया। उन्होंने कहा कि विश्व को आतंकवाद के जारी रहने से चिंतित होना चाहिए और इसे नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस सिलसिले में पाकिस्तान की निंदा न किए जाने पर यूरोपीय देशों की भी कड़ी आलोचना की।
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