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वित्त वर्ष 2024 में निर्यात सहित स्टील की खपत लगभग 132 मिलियन टन से 135 मिलियन टन होने की संभावना

केंद्रीय इस्पात और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने मुंबई में इस्पात उद्योग पर तीन दिन के ‘इंडिया स्टील 2023’ सम्मेलन और प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। केंद्रीय इस्पात मंत्रालय ने वाणिज्य विभाग, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और उद्योग मंडल फिक्की के सहयोग से गोरेगांव, मुंबई स्थित मुंबई एग्जिबीशन सेंटर में इस कार्यक्रम आयोजित किया है, जिसका मकसद इस उद्योग के लीडर्स, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साथ लाना है ताकि वे इस्पात उद्योग में नवीनतम घटनाओं, चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा कर सकें।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इस दौरान एक वीडियो संदेश के जरिए कहा, “यह सम्मेलन इससे बेहतर समय पर नहीं हो सकता था। पश्चिम से पूर्व की ओर हो रहे इस संरचनात्मक बदलाव को देखते हुए भारत अब स्टील सेक्टर की ग्रोथ और विकास के एक केंद्र के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने इस्पात उद्योग सहित विनिर्माण गतिविधियों में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत में इस्पात उत्पादन में लगातार 6 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व इस्पात संघ के नेतृत्व में वैश्विक इस्पात विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि भारत ग्लोबल स्टील ग्रोथ के विकास का केंद्र बनने जा रहा है। भारत का फिनिश्ड स्टील का उत्पादन 6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है, जबकि विश्व स्तर पर इस्पात उत्पादन में कैलेंडर वर्ष 2022 में 4.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने कहा, “हम पहले ही दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इस्पात उत्पादक के तौर पर उभर चुके हैं और हमारा प्रति व्यक्ति इस्पात उत्पादन पिछले 9 वर्षों के दौरान 57 किलो से बढ़कर 78 किलो हो गया है।” उन्होंने कहा कि यह विनिर्माण का पावरहाउस बनने के हमारे प्रण को साबित करता है। इस्पात मंत्री ने कहा कि इस बढ़ोतरी के कई तरफा नतीजे सामने आ हैं जैसे कि इस उद्योग और सरकार के बीच सहयोग भरे प्रयास देखने को मिल रहे हैं, जहां सरकार एक सूत्रधार की भूमिका निभाती है और ये उद्योग विकास के इंजन को चलाता है। उन्होंने कहा कि इस्पात मंत्रालय ने हाल ही में पीएलआई योजना के तहत स्पेशेलिटी स्टील के लिए 27 कंपनियों के साथ 57 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पीएलआई योजना द्वारा अगले पांच वर्षों में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश पैदा करने और लगभग 25 मिलियन टन स्पेशेलिटी स्टील की अतिरिक्त क्षमता सृजित करने की उम्मीद है। ये योजना एक गुणक के रूप में काम करेगी और अमृत काल में 60,000 से ज्यादा रोजगार पैदा करेगी और 2030-31 तक विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में योगदान देगी।

केंद्रीय इस्पात मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने यह भी कहा कि इस्पात मंत्रालय अपनी नीतियों को गति शक्ति मास्टर प्लान के साथ संरेखित करने की प्रक्रिया में है। ये मास्टर प्लान बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सौ लाख करोड़ रुपये के निवेश का पूरक होगा। इस्पात मंत्री ने कहा कि स्वदेशी रक्षा खरीद में बढ़ोतरी और देश में बढ़ते विनिर्माण क्षेत्र से इस्पात की मांग में इज़ाफा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “हम कई मंत्रालयों द्वारा शासित क्षेत्रों में इस्पात के उपयोग को बढ़ाने के लिए अन्य संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ भी लगातार संपर्क में हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ग्रीन स्टील के उत्पादन पर प्रधानमंत्री का जो जोर है, उसी के अनुरूप इस्पात मंत्रालय, इस्पात क्षेत्र को ज्यादा ग्रीन और टिकाऊ बनाने के लिए उचित कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इस्पात क्षेत्र के लिए जीरो वेस्ट, जीरो हार्म पॉलिसी में और धीरे-धीरे डीकार्बोनाइजेशन करने में यकीन रखती है। उन्होंने आगे कहा कि स्टील सेक्टर को फास्ट-ट्रैक करने के लिए इस्पात मंत्रालय नए विचारों और नवाचारों और नई तकनीकों को अपनाने को लेकर भी खुला नजरिया रख रहा है।

इस अवसर पर बोलते हुए राज्य मंत्री (स्टील) फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि अन्य देशों की तुलना में भारत में स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है। भारत में इस्पात की खपत वित्त वर्ष 2022 में 105 मिलियन टन थी जो 11 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2023 में 119 मिलियन टन हो गई है। उन्होंने कहा, “हम प्रधानमंत्री द्वारा देश के बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिए जाने के साथ, विकास की गति जारी रहने की उम्मीद कर सकते हैं। यह उम्मीद करना वाजिब है कि वित्त वर्ष 2024 में निर्यात सहित स्टील की खपत लगभग 132 मिलियन टन से 135 मिलियन टन होगी।” राज्य मंत्री (इस्पात) ने बताया कि राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इस्पात की खपत को बढ़ाना अनिवार्य है ताकि देश की इस्पात तीव्रता को बेहतर किया जा सके। राज्य मंत्री ने कहा कि सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने स्टील स्क्रैपिंग नीति और वाहन स्क्रैपेज नीति लागू की है जिससे स्टील उद्योग को स्टील स्क्रैप की आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि स्क्रैपेज नीति से ग्रीन स्टील के उत्पादन में भी तेजी आएगी और सुगम होगी। उन्होंने ऐसे तीन बिंदु बताए जो इस सम्मेलन में चर्चा के महत्वपूर्ण विषय हैं: 1) निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग, 2) शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच खपत के अंतर को कम करना, और 3) प्रौद्योगिकी का कार्यान्वयन।

इस्पात मंत्रालय के सचिव नागेंद्र नाथ सिन्हा ने अपने विषय संबोधन में कहा कि आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति के लिए लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु अमृत काल में देश के इस्पात निर्माताओं की एक बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने विकास के सभी पहलुओं पर काम करते हुए अपना बजट तैयार किया है और इसमें इस्पात निर्माताओं की बहुत बड़ी भूमिका है। उन्होंने इस उद्योग और अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्पात उद्योग के हितधारकों से पीएलआई योजना के दूसरे चरण को लेकर सुझाव आमंत्रित किए।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य लोगों में सुभ्रकांत पांडा (अध्यक्ष, फिक्की) और सोमा मंडल (सेल और फिक्की स्टील कमेटी की अध्यक्ष) और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे।

इंडिया स्टील 2023:

इंडिया स्टील 2023 में आकर्षक सत्रों की एक वर्गीकृत श्रंखला है, जिसमें “सक्षम करने वाले लाजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार” “भारतीय इस्पात उद्योग के लिए मांग के तत्व” “ग्रीन स्टील के माध्यम से स्थिरता लक्ष्य: चुनौतियां और आगे का रास्ता” “भारतीय इस्पात के लिए अनुकूल नीतिगत ढांचा और प्रमुख सक्षमकारी तत्व” “उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी से जुड़े समाधान” जैसे विषयों को शामिल किया गया है। भारतीय इस्पात क्षेत्र के भीतर चुनौतियों और अवसरों को संबोधित करने के मकसद से हर सत्र में स्टील उद्योग के लीडर्स, सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों के बीच गहन चर्चा होगी। इसके अलावा ये सत्र इस उद्योग के भविष्य के विकास के लिए सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने विचारों, अंतर्दृष्टि और अनुभवों का आदान-प्रदान करने के लिए हितधारकों को एक मंच प्रदान करेंगे। इंडिया स्टील 2023, स्टील उद्योग के प्रमुख मुद्दों पर गोलमेज चर्चा की एक श्रंखला की मेजबानी भी करेगा।

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