Categories: News-Headlines

लिंकेज के युक्तिकरण के परिणामस्वरूप कुल 92.16 मिलियन टन (MT) कोयले का युक्तिकरण हुआ है जिससे लगभग 6240 करोड़ रुपये की वार्षिक संभावित बचत हुई

कोयला मंत्रालय ने कोयला खदानों से उपभोक्ताओं तक कोयले के परिवहन की दूरी को कम करने के लिए कोयला लिंकेज के युक्तिकरण नामक एक पहल शुरू की है जिससे परिवहन की लागत कम होगी और कोयले से विद्युत उत्पादन की क्षमता बढ़ेगी। विद्युत क्षेत्र में कोयला लिंकेज के युक्तिकरण के परिणामस्वरूप खदानों से विद्युत संयंत्रों तक परिवहन की लागत में कमी आई है जिससे कोयले से विद्युत उत्पादन अधिक दक्ष हो गया है। यह प्रक्रिया परिवहन संबंधी अवसंरचना पर भार को कम करने, कोयला निकालने संबंधी बाधाओं को कम करने के साथ-साथ कोयले की लागत में कमी लाने में मदद करती है।

अंतर-मंत्रालयी कार्यबल (आईएमटीएफ) की सिफारिश के आधार पर राज्य/केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए लिंकेज के युक्तिकरण को कार्यान्वित किया गया। इस कार्यबल का गठन जून 2014 में किया गया था। स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों (आईपीपी) के लिंकेज को युक्तिसंगत बनाने के लिए जुलाई 2017 में एक और आईएमटीएफ का गठन किया गया था। आईपीपी/निजी क्षेत्र के संयंत्रों के लिए कोयले के युक्तिकरण की पद्धति भी 15 मई 2018 को जारी की गई थी। कोयला लिकेंज को और अधिक तर्कसंगत बनाने की संभावना को तलाशने के लिए अक्टूबर 2018 में एक आईएमटीएफ का भी गठन किया गया था, जिसमें तटीय क्षेत्रों के पास ढुलाई किए जाने वाले घरेलू कोयले के साथ भीतरी इलाकों में पहुंचाए जाने वाले आयातित कोयले की स्वैपिंग भी शामिल थी।

अब तक, लिंकेज के युक्तिकरण के चार राउंड हो चुके हैं, जिसमें 73 ताप विद्युत संयंत्र (टीपीपी) शामिल हैं, जिनमें से 58 राज्य/केंद्रीय विद्युत उत्पादन कंपनियों (जेनको) और 15 स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों (आईपीपी) से संबंधित हैं। लिंकेज के युक्तिकरण के परिणामस्वरूप कुल 92.16 मिलियन टन (एमटी) कोयले का युक्तिकरण हुआ है जिससे लगभग 6240 करोड़ रुपये की वार्षिक संभावित बचत हुई है।

कोयला लिंकेज के युक्तिकरण के लिए कोयला मंत्रालय की व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में, कोल इंडिया लिमिटेड ने स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों (आईपीपी) और उत्पादन कंपनियों (जेनको) दोनों से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) आमंत्रित करके एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस दूरदर्शी नीति का उद्देश्य परिवहन लागत को काफी हद तक कम करना है, जिससे ईंधन खर्च को नियंत्रित किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं को वास्तविक रूप से लाभ मिलेगा।

कोयला लिंकेज के युक्तिकरण के माध्यम से, कोयला पीएसयू की न सिर्फ परिचालन क्षमता ही बढ़ेगी बल्कि लागत को भी कम किया जा रहा है और अधिक टिकाऊ ऊर्जा इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह नीति पर्यावरणीय संवेदनशीलता के साथ-साथ आर्थिक विकास को संतुलित करने की हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। कोयला मंत्रालय की नवोन्मेषी नीतिगत पहल ऐसे भविष्य को आकार दे रही है जहां दक्षता, सामर्थ्य और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में बेहतर तालमेल हो।

Leave a Comment

Recent Posts

FIU-IND और PFRDA ने सूचना साझाकरण और समन्वय को बढ़ाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा… Read More

5 hours ago

धन-शोधन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई और SEBI ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारत में धन-शोधन और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में… Read More

5 hours ago

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की बातचीत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर डॉ. क्रिश्चियन स्टॉकर ने डेलीगेशन लेवल की… Read More

7 hours ago

आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हराया

आईपीएल क्रिकेट में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने लखनऊ सुपर जायंट्स को पांच विकेट से हरा… Read More

9 hours ago

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य समूह की पहली बैठक 2026 की मेजबानी की

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार ने नई दिल्ली में ब्रिक्स स्वास्थ्य कार्य… Read More

9 hours ago

NHAI ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ईटीसी) प्रणाली में डेटा की सटीकता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए सभी फास्टटैग जारीकर्ता बैंकों को निर्देश जारी किए

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) प्रणाली में डेटा की सटीकता… Read More

9 hours ago

This website uses cookies.