लगातार गहराते वित्तीय और मानवीय संकट के कारण श्रीलंका दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया है। खाद्य पदार्थों की कीमतें बहुत अधिक बढ़ने से श्रीलंका में मुद्रास्फीति रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
कोविड संकट और पर्यटन व्यवसाय प्रभावित होने से राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे के नेतृत्व वाली सरकार को कठिन आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अत्यधिक सरकारी खर्च, कर कटौती से राजस्व में कमी और चीन से लिये भारी ऋण चुकता करने की चुनौती भी सरकार के समक्ष है। विदेशी मुद्रा भंडार एक दशक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। सरकार द्वारा घरेलू ऋणों और विदेशी बांडों का भुगतान करने के लिए मुद्रा की छपाई से महंगाई बढ़ी है। राष्ट्रपति राजपक्षे ने देश में आर्थिक आपातकाल घोषित कर दिया है।
विश्व बैंक का अनुमान है कि श्रीलंका में महामारी की शुरुआत के बाद से पांच लाख लोग गरीबी की रेखा से नीचे चले गए हैं।
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