पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने देश के सामाजिक-आर्थिक और विनियामकीय माहौल को मजबूत बनाने के लिए सागरमाला कार्यक्रम के तहत सामुद्रिक उद्योग में कई सुधारों को आगे बढ़ाया और कई कदम उठाए हैं। रो-रो (रोल ऑन, रोल ऑफ) फेरी परिवहन इकोसिस्टम को प्रोत्साहन और विकास मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जो परिवहन के पारम्परिक साधनों की तुलना में छोटी दूरी की यात्राओं, कम लॉजिस्टिक लागत और कम प्रदूषण जैसे कई लाभों की पेशकश करती है।
सागरमाला के तहत मंत्रालय ने गुजरात में घोघा-हजीरा और महाराष्ट्र में मुंबई-मांडवा के बीच रो-पैक्स फेरी सेवा शुरू की है। इन सेवाओं ने स्वच्छ पर्यावरण और लोक कल्याण में योगदान देते हुए अभी तक 24.15 लाख से अधिक यात्रियों, 4.58 लाख कारों और 36.3 हजार ट्रकों का परिवहन किया है।
सेवाओं के विकास और संचालन को मानकीकृत और सुव्यवस्थित करने के क्रम में, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने हितधारकों के साथ परामर्श के बाद जून 2022 में ‘भारत के तट पर रो-रो और रो-पैक्स फेरी सेवा के संचालन के लिए मसौदा दिशानिर्देश’ तैयार और वितरित किया था।
सार्वजनिक और निजी हितधारकों से मिले सुझावों को देखते हुए और समुद्री तट रेखा पर विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे की स्थापना और सेवाएं देने के विजन के साथ मंत्रालय ने अब एक दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी के चेयरमैन की अगुआई वाली एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति को रो-रो और रो-पैक्स फेरी सेवा के संचालन के लिए संशोधित मसौदा दिशानिर्देश तैयार करने हैं। यह समिति एक साथ रो-रो/रो-पैक्स टर्मिनल ऑपरेटर के लिए मॉडल कंसेशन समझौता और रो-रो/रो-पैक्स/फास्ट पैसेंजर फेरी के संचालन के लिए मॉडल लाइसेंस समझौते का मसौदा तैयार करेगी।
समिति व्यवस्थित दस्तावेज तैयार करने के लिए जहाजों के सुरक्षा मानकों, यात्रियों/कार्गो की अधिक बोर्डिंग पर नियंत्रण तंत्र, ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली, राजस्व लेखा/साझाकरण तंत्र, वैधानिक मंजूरियों, विशेष अवधि, नई और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसी जमीनी वास्तविकताओं पर विचार करेगी। इससे अनावश्यक विलंब, असहमतियां दूर होंगी और रो-रो/रो-पैक्स फेरी सेवा का सुगम और सुरक्षित संचालन आसान हो जाएगा। इससे देश में निवेश और व्यापार करने के लिए अधिक घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उपक्रमों को आकर्षित करने वाले सभी हितधारकों के बीच विश्वास पैदा करने के साथ कारोबारी सुगमता में भी बढ़ोतरी होगी।
आम बजट 2023-24 में, यह प्रस्ताव किया गया है कि पीपीपी मोड के माध्यम से यात्रियों और माल दोनों के लिए ऊर्जा कुशल और परिवहन के कम लागत वाले साधन के रूप में तटीय नौवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जो देश के हरित विकास पर जोर के अनुकूल है।
इस कदम के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रस्तावित समिति देश में रो-पैक्स फेरी विकास के भविष्य के रोडमैप को तैयार और सुव्यवस्थित करेगी। साथ ही, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के जलमार्गों का दोहन करने और उन्हें देश के आर्थिक विकास के साथ जोड़ने के विजन को लागू करेगी।
सागरमाला कार्यक्रम के तहत, मंत्रालय भारत में शहरी जल परिवहन सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए 1,900 करोड़ रुपये लागत वाली 51 परियोजनाओं को वित्तीय समर्थन दे रही है, जिनमें से 500 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं को पहले ही पूरा किया जा चुका है।
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