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रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान नई लाइनों, आमान परिवर्तन और मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं के 2022 ट्रैक किलोमीटर (TKM) पूरे किए

भारतीय रेलवे लॉजिस्टिक्स (रसद) की इकाई लागत को कम से कम करने की दिशा में काम कर रहा है। हालिया समय में, रेल पटरियों से संबंधित रेल अवसंरचना परियोजनाओं को काफी बढ़ावा दिया गया है और इसके परिणामस्वरूप एक प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। रेलवे ट्रैक परियोजनाओं की प्रगति यानी कि नई लाइनें, गेज परिवर्तन और मल्टी- ट्रैकिंग (दोहरीकरण/तिगुनी) में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दोगुनी से अधिक बढ़ोतरी हुई है। रेलवे ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 12 दिसंबर 2022 तक नई लाइनों, आमान परिवर्तन और मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं के 2022 ट्रैक किलोमीटर (टीकेएम) पूरे किए हैं।

इस वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक 109 ट्रैक किलोमीटर नई लाइन, 102 ट्रैक किलोमीटर आमान परिवर्तन और 1811 ट्रैक किलोमीटर मल्टी ट्रैकिंग पूरी की जा चुकी है। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान यह आंकड़ा मार्च, 2022 के पहले सप्ताह में प्राप्त की गई थी।

2009-14 के दौरान दोहरीकरण का औसत प्रतिवर्ष 375 किलोमीटर था। 2014-22 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर प्रतिवर्ष 1394 किलोमीटर हो गया है। वहीं, पिछले साल नवंबर तक 756 किलोमीटर दोहरीकरण/मल्टी-ट्रैकिंग की गई थी। यह इस साल बढ़कर 1930 किलोमीटर तक हो गई है।

भारतीय रेलवे (आईआर) ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान मार्च में 2,000 किलोमीटर की ट्रैक पर परिचालन शुरु किया था। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 में इस आंकड़े को दिसंबर को दूसरे सप्ताह में प्राप्त कर लिया है। बीते साल भारतीय रेलवे ने सबसे अधिक 2904 किलोमीटर लाइन पर परिचालन को शुरू किया था।

शुरू की गईं प्रमुख परियोजनाएं :

दोहरीकरण/मल्टी-ट्रैकिंग: मुंबई- चेन्नई के स्वर्णिम चतुर्भुज मार्ग के तहत दौंड- गुलबर्गा (225 किलोमीटर), आंध्र प्रदेश में विजयवाड़ा- गुडिवाड़ा- भीमावरम (221 किलोमीटर) दोहरीकरण, तेलंगाना में सिकंदराबाद- महबूबनगर दोहरीकरण (85 किलोमीटर), राजस्थान व मध्य प्रदेश में नीमच- चित्तौड़गढ़ दोहरीकरण, बलिया-गाजीपुर दोहरीकरण, पश्चिम बंगाल में दानकुनी- चंदनपुर की तीसरी लाइन, बंदेल- बोंची, बोंची-शक्तिगढ़ व खड़गपुर- नारायणगढ़ की तीसरी लाइन, बिहार में हाजीपुर-बछवाड़ा दोहरीकरण (72 किलोमीटर), पश्चिम बंगाल में खड़गपुर- नारायणगढ़ की तीसरी लाइन (20 किलोमीटर), उत्तर प्रदेश में भाऊपुर-पनकी की चौथी लाइन (11 किलोमीटर), केरल के कुरुप्पनथारा- चिंगवनम दोहरीकरण (27 किलोमीटर), झारखंड के जारंगडीह-दानिया दोहरीकरण, ओडिशा के संबलपुर-टिटलागढ़ दोहरीकरण (182 किलोमीटर)

गेज परिवर्तन: राजस्थान और गुजरात में अहमदाबाद-हिम्मतनगर-उदयपुर गेज परिवर्तन

नई लाइन: तेलंगाना में भद्राचलम-सत्तुपल्ली (56 किलोमीटर)

कोलकाता मेट्रो: स्टैंडर्ड गेज पर कोलकाता पूर्व- पश्चिम मेट्रो गलियारा परियोजना के फूलबागान से सियालदह (2.33 किलोमीटर) का हिस्सा पूरा हुआ और 14.07.2022 को इस पर परिचालन शुरू किया गया।

वहीं, बेदी पत्तन के अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी का काम पूरा हो चुका है और इसे 22 जुलाई को गुजरात मैरीटाइम बोर्ड की प्रमुख इक्विटी भागीदारी (75 फीसदी) के साथ शुरू किया गया।

यह उल्लेखनीय है कि 2021-22 के दौरान नई लाइन/दोहरीकरण/गेज परिवर्तन में 2400 किलोमीटर के लक्ष्य की तुलना में 2904 किलोमीटर की उपलब्धि प्राप्त की गई थी। यह अब तक की सबसे अधिक शुरू की गई परिचालन (डीएफसी को छोड़कर) थी।

रेल परियोजनाओं के प्रभावी और त्वरित कार्यान्वयन के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। इनमें (i) प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए धनराशि के आवंटन में पर्याप्त बढ़ोतरी, (ii) क्षेत्र स्तर पर शक्तियों को सौंपा जाना- हाल ही में बोर्ड से क्षेत्रीय रेलवे को ब्लॉक और नॉन- इंटरलॉक्ड वर्किंग की अनुमति देने के अधिकार दिए गए हैं, जिससे दोहरीकरण परियोजनाओं को चालू करने में सहायता मिली है। (iii) विभिन्न स्तरों पर परियोजना की प्रगति की गहन निगरानी और (iv) तेजी से भूमि अधिग्रहण, वानिकी व वन्यजीव मंजूरी और परियोजनाओं से संबंधित अन्य मुद्दों को हल करने के लिए राज्य सरकारों और संबंधित प्राधिकरणों के साथ नियमित कार्रवाई शामिल हैं।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान:

माननीय प्रधानमंत्री ने अक्टूबर, 2021 में पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य ढांचागत परिवहन परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन में एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण लाना है। एनएमपी का उद्देश्य देश में मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी विकसित करने और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के व्यापक उद्देश्य के साथ कीमती राष्ट्रीय संसाधनों के दोहराव व अपव्यय से बचने के लिए रेलवे, पोत परिवहन, सड़क परिवहन, दूरसंचार व पाइपलाइन आदि जैसे बुनियादी क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करना है। मेक इंडिया पहल के साथ लागत में कमी से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में काफी सुधार होगा।

भारतीय रेलवे ने अपनी परियोजना नियोजन प्रक्रिया में गतिशक्ति के प्रावधानों को तत्काल अपना लिया है। बीआईएसएजी-एन द्वारा विकसित गतिशक्ति जीआईएस प्लेटफॉर्म पर 342 से अधिक रेलवे परियोजनाओं की मैपिंग की गई है।

रेलवे बोर्ड में एक गति शक्ति निदेशालय गठित गया है और भारतीय रेलवे के सभी 68 मंडलों में गति शक्ति इकाइयां बनाई गई हैं। इसका उद्देश्य परियोजना नियोजन और कार्यान्वयन के घटकों के बीच पूर्ण सामंजस्य स्थापित करना है। रेलवे में गति शक्ति संस्थागत प्रणाली अन्य सभी संबंधित मंत्रालयों और केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों के विभागों के लिए परियोजना नियोजन, स्वीकृति और निष्पादन के लिए एकल खिड़की इंटरफेस है।

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