भारत-रूस संयुक्त प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं त्वरित व्यावसायीकरण कार्यक्रम के तहत संयुक्त अनुसंधान एवं विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण परियोजनाओं को शुरू करने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित तीन भारतीय छोटे से लेकर मध्यम उद्यमों / स्टार्ट-अप का चयन किया गया है।
चयनित कंपनियों में से दो – प्रान्ते सॉल्यूशंस और जेयन इम्प्लांट्स को अनुसंधान एवं विकास की संयुक्त परियोजनाओं के तहत वित्त पोषित किया जा रहा है और तीसरी कंपनी, अनन्या टेक्नोलॉजीज, को रूस से प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए वित्त पोषित किया गया है।
प्रान्ते सॉल्यूशंस को डिस्पोजेबल कार्ट्रिज पर आधारित मल्टीप्लेक्स इम्यूनोफ्लोरेसेंस एनालिसिस नाम की एक तकनीक द्वारा संधिवात गठिया या रूमटॉइड आर्थ्राइटिस (आरए) के देखभाल संबंधी निदान के त्वरित बिंदु के लिए एक प्लेटफार्म के विकास के लिए वित्त पोषित किया जा रहा है। इस कंपनी का लक्ष्य एलिसा-आधारित सीरोलॉजिकल डायग्नोसिस से जुड़ी कठिनाइयों को दूर करते हुए रूमटॉइड आर्थ्राइटिस (आरए) की तेजी से पहचान के लिए एक पोर्टेबल पॉइंट-ऑफ-केयर तकनीक सृजित करना है।
जेयन इम्प्लांट्स को दिया जाने वाला समर्थन कृत्रिम प्रौद्योगिकियों के विकास और हाथ एवं पैर के जोड़ों, उसके बगल के जोड़ों, बड़े जोड़ों के साथ ही दंत प्रत्यारोपण के लिए सिरेमिक एंडोप्रोस्थेस के निर्माण में मदद करेगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रूमटॉइड आर्थराइटिस, अपक्षयी घावों, चोट और ऊपरी अंगों के जोड़ों के आर्थ्रोसिस के रोगियों के लिए अनूठे एवं नवीन चिकित्सा उपकरणों का निर्माण और व्यावसायीकरण करना है।
अनन्या टेक्नोलॉजीज को अपने रूसी समकक्ष के साथ इंटीग्रेटेड स्टैंडबाय इंस्ट्रूमेंट सिस्टम और उससे जुड़े जांच उपकरण के संयुक्त विकास के लिए वित्त पोषित किया जा रहा है।
भारत-रूस संयुक्त प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं त्वरित व्यावसायीकरण कार्यक्रम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार और फाउंडेशन फॉर असिस्टेंस टू स्माल इनोवेटिव इंटरप्राइजेज (एफएएसआईई) की एक संयुक्त पहल है। भारतीय पक्ष की ओर से, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की तरफ से इस कार्यक्रम को लागू कर रहा है।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा ने जोर देकर कहा कि भारत-रूस संयुक्त प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं त्वरित व्यावसायीकरण कार्यक्रम हमारे प्रधानमंत्री की “आत्मनिर्भर भारत” नीति के अनुरूप है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और रूसी संघ के फाउंडेशन फॉर असिस्टेंस टू स्माल इनोवेटिव इंटरप्राइजेज (एफएएसआईई) द्वारा वित्त पोषित की जा रही संयुक्त रूप से चयनित परियोजनाएं दोनों देशों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में आपसी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतरराष्ट्रीय प्रभाग के प्रमुख श्री एस.के. वार्ष्णेय ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत और रूस के बीच नए सिरे से द्विपक्षीय सहयोग प्रदान करेंगी और तकनीकी-उद्यमी सहयोग और अन्य उद्यमियों को साथ मिलकर काम करने के साझा आधार तलाशने के लिए प्रेरित करेंगी।
भारत-रूस संयुक्त प्रौद्योगिकी मूल्यांकन एवं त्वरित व्यावसायीकरण कार्यक्रम जुलाई 2020 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारत और रूस के बीच एक द्विपक्षीय पहल के रूप में शुरू किया गया था। इस कार्यक्रम के तहत प्रथम आमंत्रण पर कई संयुक्त प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से तीन प्रस्तावों को एक कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद वित्त पोषण के लिए चुना गया है।
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