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राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों और राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थानों के निदेशकों के सम्‍मेलन का उद्घाटन किया

राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा है कि बडे लक्ष्‍य प्राप्‍त करने के लिए उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की गुणवत्‍ता में सुधार करना बहुत महत्‍वपूर्ण है। आज शाम राष्‍ट्रपति भवन में केंद्रीय विश्‍वविद्यालयों के कुलपतियों और राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थानों के निदेशकों के दो दिन के सम्‍मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि हमें विश्‍व में श्रेष्‍ठ बनने के लिए पैमाने तय करने चाहिए। उन्‍होंने प्रसन्‍नता व्‍यक्‍त की कि इस वर्ष भारत के 35 संस्‍थान गुणवत्‍ता रैंकिंग में शामिल हुए जबकि पिछले वर्ष इनकी संख्‍या केवल 29 थी। शीर्ष 300 संस्‍थानों में इस वर्ष छह शामिल हैं जबकि पिछले वर्ष केवल चार थे। राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीय विज्ञान संस्‍थान ने अनुसंधान में पूरे सौ अंक प्राप्‍त किए। इस संस्‍थान ने प्रिंसटन, हार्वर्ड, एमआईटी और कालटेक सहित विश्‍व के आठ अतिप्रतिष्ठित संस्‍थानों के समान दर्जा हासिल किया। राष्‍ट्रपति कोविंद ने इस उपलब्धि के लिए भारतीय विज्ञान संस्‍थान के निदेशक और उनकी टीम को बधाई दी।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्‍सव भारत के स्‍वाधीनता आंदोलन के गौरवमयी इतिहास की स्‍मृति में मनाया जा रहा है। आरंभिक सत्र में इस महोत्‍सव पर चर्चा हुई। राष्‍ट्रपति ने कहा कि इसके लिए उच्‍च शिक्षा संस्‍थान केन्‍द्रीय भूमिका में हैं क्‍योंकि युवा नागरिक न सिर्फ अतीत की धरोहर के सरंक्षक हैं बल्कि उन्‍हें भारत को अगले सुनहरे दौर में ले जाने के अभियान का नेतृत्‍व भी करना होगा। राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि युवाओं के कायाकल्‍प में उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की बड़ी भूमिका है। इसके लिए उन्‍हें युवाओं की आकांक्षाएं पूरी करनी होंगी क्‍योंकि वे जीवन के विभिन्‍न क्षेत्रों में भविष्‍य के नेता हैं।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्‍ता सुधारने के लिए हमें सीखने के उन्‍नत और नए-नए तरीकों पर विचार करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि यही उत्‍कृष्‍टता हासिल करने की कुंजी है। शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया समृद्ध करने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी का पूरा लाभ उठाना होगा। राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी शिक्षा की सीमाओं का विस्‍तार कर रही है। उन्‍होंने कहा कि जब महामारी ने शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया को खतरे में डाला तो प्रौद्योगिकी ने शिक्षा को जारी रखना सुनिश्चित किया। राष्‍ट्रपति ने कहा कि कठिनाइयां तो रहीं लेकिन यह देखकर अच्‍छा लगा कि शिक्षा संस्‍थानों ने बिना किसी रूकावट के शिक्षा प्रदान की और मूल्‍यांकन तथा अनुसंधान की प्रक्रिया जारी रखी। उन्‍होंने कहा कि हम इस अनुभव से सीख सकते हैं और इसके आधार पर कक्षाओं के सत्र को अधिक सक्रिय और विचार-विमर्शपूर्ण बना सकते हैं तथा विद्यार्थियों को विषय अच्‍छी तरह समझा सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि शिक्षकों और विद्वानों को पाठ्यक्रम और अन्‍य नीतिगत पहल तैयार करते समय इस बात पर विचार करना चाहिए।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि स्‍टार्टअप और नवाचार की पारिस्थितिकी को प्रोत्‍साहित करने के लिए 28 राज्‍यों और 6 केन्‍द्र शासित प्रदेशों के उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों में लगभग दो हजार 775 संस्‍थागत नवाचार परिषदों का गठन किया गया है। उन्‍होंने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया कि इससे उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों और उद्योग जगत के बीच सामाजिक रूप से प्रांसगिक साझेदारी के लक्ष्‍य को दीर्घकालिक प्रोत्‍साहन मिलेगा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत की रैंकिंग में महत्‍वपूर्ण सुधार हुआ है और यह 2014 में 76 से सुधरकर 2021 में 46 हो गई। उन्‍होंने कहा कि भारत में नवाचार और उद्यमिता की संस्‍कृति में सुधार के लिए हमें पेटेंट के लिए आवेदन की प्रक्रिया को प्रोत्‍साहन देने और उसमें तालमेल की आवश्‍यकता है।

राष्‍ट्रपति 161 केन्‍द्रीय उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के विजिटर हैं। इनमें से 53 संस्‍थान सम्‍मेलन में भाग ले रहे हैं और शेष वर्चुअल माध्‍यम से शामिल हुए हैं।

सम्‍मेलन के विभिन्‍न सत्रों में अनेक विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। ये हैं- आजादी का अमृत महोत्‍सव में उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की भूमिका और उत्‍तरदायित्‍व, उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों की अंतर्राष्‍ट्रीय रैंकिंग, शिक्षा और उद्योग जगत तथा नीति निर्माताओं के बीच सहयोग, समेकित विद्यालयी, उच्‍च और व्‍यवसायिक शिक्षा, उभरती और विध्‍वंसक प्रौद्योगिकी के बारे में शिक्षा और अनुसंधान।

सम्‍मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान राष्‍ट्रपति ने हाईपोक्‍सिया इंड‍ियूस्ड थ्रोमबोसिस के बारे में अनुसंधान के लिए जामिया मिलिया इस्‍लामिया के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रोफेसर मोहम्‍मद जाहिद अशरफ को अनुसंधान के लिए 2020 को विजिटर्स पुरस्‍कार प्रदान किया। प्रौद्योगिकी विकास के लिए 2020 का विजिटर पुरस्‍कार तेजपुर विश्‍वविद्यालय के भौ‍तिकी विभाग के प्रोफेसर प्रीतम देब को प्रदान किया गया। प्रोफेसर प्रीतम ने खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग के लिए द्विआयामी हीटेरो संरचना के साथ बायो डिग्रेडेबल पोलिमर फिल्‍म के विकास पर कार्य किया है।

भौतिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए 2020 का विजिटर पुरस्‍कार हैदरबाद विश्‍वविद्यालय के रसायन विज्ञान विद्यालय के प्रोफेसर अनुनेय सामन्‍ता को बाद में प्रदान किया जाएगा। उन्‍हें आणविक प्रणाली और सामग्रियों के प्रकाश उत्‍तेजन से बनी अल्‍प समय तक जीवित रहने वाली रासायनिक प्रजातियों की स्‍पेक्‍ट्रोसकॉपी और गति विज्ञान में योगदान के लिए यह पुरस्‍कार मिलेगा।

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