राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में कल (27 फरवरी 2023) को भारत और डेनमार्क की समृद्ध चांदी की विरासत की झलक पेश करने वाली ‘भारत एवं डेनमार्क की रजत धरोहर’ नामक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन डेनमार्क के महामहिम क्राउन प्रिंस और महामहिम क्राउन प्रिंसेस ने विदेश और संस्कृति राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी, डेनमार्क के विदेश मंत्री महामहिम लार्स लोके रासमुसेन और महानिदेशक राष्ट्रीय संग्रहालय और संयुक्त सचिव, संस्कृति लिली पांडेय की उपस्थिति में किया।
इस अवसर पर अपने विशेष संबोधन में मीनाक्षी लेखी ने भारत-डेनमार्क की मित्रता पर जोर देते हुए कहा, “जहां तक दोनों देशों का संबंध है, जब कोई डेनमार्क के बारे में सोचता है, तो वह उसमें अपने मित्र की झलक देखता है। मुझे यकीन है कि डेनमार्क के दिलो-दिमाग में भी ऐसी ही भावना है कि आप जब भारत के बारे में सोचते हैं, तो आपको उसमें अपने मित्र की झलक दिखाई देती है। दोनों मित्र राष्ट्र कई लोकाचारों, कई मूल्य व्यवस्थाओं से बंधे हैं, जिनमें लोकतंत्र, कानून और व्यवस्था का महत्व और साथ ही साथ कानून का पालन करने वाले नागरिक शामिल हैं। मुझे लगता है कि समान सांस्कृतिक विरासत होना बहुत मददगार रहता है। संस्कृति जोड़ती है, संस्कृति बहुत सकारात्मक शक्ति होती है, क्योंकि जब आप एक-दूसरे को समझने की कोशिश करते हैं, तो किसी एक के हिचकिचाहट महसूस करने के बावजूद जैसे ही उसी मामले पर वह दूसरे के दृष्टिकोण को जानना शुरु करता है, तो उसकी वह हिचकिचाहट गायब हो जाती है तथा दृष्टिकोण की समझ हमें एक नया दृष्टिकोण देती है, और विचारों का नया मिश्रण आमतौर पर सकारात्मक होता है। इसलिए हम सभी का प्रयास जमीन को जीतना नहीं, बल्कि दिलों को जीतना है और दिलों की इसी जीत के साथ हम आज रजत धरोहर को प्रदर्शित कर रहे हैं।”
यह प्रदर्शनी दो विशिष्ट देशों की विविध प्रकार की चांदी की कलाकृतियों का मिलन स्थल है। यह 250 से अधिक चांदी की विलक्षण कलाकृतियों को पांच अलग-अलग विषयों में पृथक रूप से प्रदर्शित करता है जो दोनों देशों के शिल्प कौशल और चांदी का काम करने वालों की तकनीकों की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल करता है। यह पहल राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के आरक्षित संग्रह से कुछ दुर्लभ कलाकृतियों को प्रदर्शित करने का मार्ग प्रशस्त करती है, जैसा कि डेनमार्क के कोल्डिंग संग्रहालय के निदेशक रून ओटोग्रीन लुंडबर्ग ने ठीक ही कहा है- ‘यह प्रदर्शनी भारत और डेनमार्क के बीच सांस्कृतिक मील का पत्थर है। संस्कृति एक सेतु का निर्माण करती है जहां हम एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं और एक दूसरे की दुनिया, भिन्नताओं और समानताओं के बारे में गहन जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रदर्शनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान के एक कार्यक्रम का हिस्सा है, जो 2026 तक जारी रहेगा – इसलिए संस्कृति, शिल्प, संगीत और साहित्य में आदान-प्रदान के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद है।
भारत और डेनमार्क के बीच शुरुआती संपर्क भी व्यापार के माध्यम से आदान-प्रदान से संबंधित था। उत्तम भारतीय शिल्पकारिता और सुंदर वस्त्रों की मांग यूरोप में बहुत बढ़ गई और वस्तुओं के आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध स्थापित हुए। इस संबंध में हम समान इतिहास साझा करते हैं।”
उद्घाटन समारोह में एस्टोनिया गणराज्य के दूतावास, पुर्तगाल के दूतावास, स्विट्जरलैंड के दूतावास जैसे विभिन्न दूतावासों के विशिष्ट अतिथियों और प्रतिनिधियों तथा अन्य लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम के बाद प्रदर्शनी की क्यूरेटोरियल टीम द्वारा डेनमार्क के महामहिम क्राउन प्रिंस और महामहिम क्राउन प्रिंसेस के लिए एक विशेष पूर्वावलोकन कार्यक्रम आयोजित किया गया। क्यूरेटोरियल वॉक में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली और कोल्डिंग संग्रहालय, डेनमार्क दोनों की कलाकृतियां शामिल थीं।
महानिदेशक लिली पांडेय ने प्रदर्शनी स्थल पर प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और उनका स्वागत भाषण प्रदर्शनी की आज की प्रासंगिकता पर केंद्रित रहा: ‘ जिस समय प्रकृति वसंत में पुष्पित-पल्लवित हो रही है; हम कोल्डिंग संग्रहालय, डेनमार्क और राष्ट्रीय संग्रहालय, भारत के बीच अद्वितीय क्यूरेटोरियल सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से भारत और डेनमार्क की शानदार चांदी की विरासत को प्रदर्शित करने वाली इस शानदार प्रदर्शनी ‘भारत एवं डेनमार्क की रजत धरोहर’ के उद्घाटन के साथ इसकी सुंदरता में शामिल हो रहे हैं, आनन्दित हो रहे हैं और जश्न मना रहे हैं। सीमाओं जुदा होने के बावजूद हमारे अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रयास, हमें ‘एक’ के रूप में एकजुट करते हैं, और भारत की जी-20 अध्यक्षता (2023) की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ ‘दुनिया एक परिवार है’ की भावना को प्रतिध्वनित करते हैं।’
प्रदर्शित की गई वस्तुओं में राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली के संग्रह से सिंधु घाटी सभ्यता की चांदी की वस्तुएं जिनमें चांदी के दुर्लभ मोती, प्राचीन और मध्यकालीन भारत के सिक्के, लघु मूर्तियां, आभूषण, हुक्के, विशेष नक्काशी और एनामेल वाले इत्रदान और अन्य सजावटी सामान हैं को प्रदर्शित किया गया है। जबकि कोल्डिंग संग्रहालय, डेनमार्क के संग्रह से चांदी का बाइबिल कवर, स्पिनिंग कैटल, बाइबिल की कहानियों को चित्रित करने वाले प्याले के साथ ही साथ इत्रदान, आभूषण, कटलरी जैसी वस्तुएं भारत और डेनमार्क के चांदी के उत्कृष्ट संग्रह को प्रस्तुत करते हैं।
बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी कुमार’ की लोकप्रियता बरकरार बॉलीवुड अभिनेता Akshay Kumar एक बार फिर चर्चा… Read More
एलन मस्क की संपत्ति पर दुनिया की नजर दुनिया के सबसे चर्चित उद्योगपतियों में से… Read More
शतरंज जगत का बड़ा नाम हैं हिकारू नाकामुरा दुनिया के सबसे लोकप्रिय और सफल शतरंज… Read More
भारतीय खेल जगत को लगा बड़ा झटका भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज, एशियाई खेलों के स्वर्ण… Read More
बिग बॉस 20 को लेकर फैंस में बढ़ा उत्साह टेलीविजन के सबसे चर्चित रियलिटी शो… Read More
पटना हाईकोर्ट पहुंचे खान सर प्रसिद्ध शिक्षक और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय एजुकेटर Khan Sir… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment