विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. एस. चंद्रशेखर ने कल 27 अप्रैल, 2023 को “राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (नेशनल मैन्युफैक्चरिंग इनोवेटिव सर्वे – एनएमआईएस) 2021- 22 : नीति निर्माताओं के लिए सारांश” जारी किया।
डॉ. चंद्रशेखर ने नीति निर्माताओं के लिए सर्वेक्षण के परिणामों को समाहित करने वाली सारांश रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि “राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (एनएमआईएस) 2021-22 को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा किया गया था क्योंकि भारत सरकार ने भारतीय विनिर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में इसकी हिस्सेदारी बढ़ाने को प्राथमिकता दी है।”
डॉ. चंद्रशेखर ने विस्तार से बताया कि “सर्वेक्षण निष्कर्ष फर्मों द्वारा नवाचार के लिए सक्षम गतिविधियों और बाधाओं में व्यापक अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं और इन्होनें बारीकी से यह मूल्यांकन किया है कि नए उत्पादों, सेवाओं और व्यावसायिक प्रक्रियाओं का उत्पादन करने की निर्माण फर्मों की क्षमता के संबंध में राज्यों और क्षेत्रों ने कैसा प्रदर्शन किया है। सर्वेक्षण के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण भी भारत में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करता है और इस प्रकार, मुझे उम्मीद है कि यह रिपोर्ट नवाचार और आर्थिक विकास के क्षेत्र में नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों के लिए बहुत रुचिकर होगी”।
डॉ. चंद्रशेखर ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ये अनुभव मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम के उद्देश्य, विशेष रूप से उत्पादन से जुडी प्रोत्साहन (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव – पीएलआई) योजनाओं में ऐसे महत्वपूर्ण मूल्य जोड़ सकती हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सहित विभिन्न क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं और वे परिणाम भी दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नवप्रवर्तकों को वास्तव में अच्छे नवाचारों के साथ सामने आना चाहिए जो कि सस्ते होने के साथ ही प्रक्रियाओं में न्यूनतम बदलाव की आवश्यकतावाले हो, और इस प्रकार परिणामी उत्पाद सस्ते, बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल होने चाहिए। साथ ही, ऐसे नवाचारों को समाहित करने की क्षमता वाले पर्याप्त कारखाने भी होने चाहिए।
डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि “राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (एनएमआईएस) के अध्ययन और निष्कर्ष विनिर्माण मूल्य-श्रृंखला में कुछ क्षमताओं और क्षमताओं, अवसरों और चुनौतियों के आधार को मजबूत करने में योगदान देंगे और जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।”
राष्ट्रीय विनिर्माण नवाचार सर्वेक्षण (नेशनल मैन्युफैक्चरिंग इनोवेटिव सर्वे – एनएमआईएस) 2021-22 भारत में निर्माण फर्मों के नवाचार प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (यूनाइटेड नेशन्स इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन – यूएनआईडीओ) द्वारा किया गया एक संयुक्त अध्ययन है। एनएमआईएस 2021-22 अध्ययन को द्वि -आयामी सर्वेक्षण के रूप में आयोजित किया गया था, जिसमें निर्माण फर्मों में नवाचार प्रक्रियाओं, परिणामों और बाधाओं की जांच की गई थी और इन फर्मों में नवाचार परिणामों को प्रभावित करने वाले नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का भी अध्ययन किया गया था। यह अध्ययन 2011 में आयोजित विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के पहले राष्ट्रीय नवाचार सर्वेक्षण के अनुरूप किया गया हैI
डीएसटी-यूनिडो द्वारा परस्पर सभागिता में किए गए इस अध्ययन ने फर्म स्तर पर विनिर्माण नवाचार परिणामों, प्रक्रियाओं और बाधाओं को मापने के लिए 360-डिग्री दृष्टिकोण की अनुमति देने के साथ ही योगदान प्रक्रियाओं और परस्पर विमर्श (इंटरैक्शन) का मानचित्रण (मैपिंग) किया और इस तरह राज्यों, क्षेत्रों और फर्म के आकार के प्रदर्शन का आकलन किया।
विज्ञान इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (एसईआरबी) के सचिव एवं विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) में वरिष्ठ सलाहकार एवं पीसीपीएम प्रमुख डॉ. अखिलेश गुप्ता ने इस सर्वेक्षण की रूपरेखा दी और कहा कि नवाचारों के लिए बाजार की मांग को सुविधाजनक बनाने के लिए सर्वेक्षण ने भारत में विनिर्माण अर्थव्यवस्था की वर्तमान नवाचार गतिविधियों के साथ-साथ संगठनात्मक कठोरता को नेविगेट करने के तरीकों की अनुभवजन्य समझ की पेशकश की। उन्होंने कहा कि “तकनीकी सीखने, नवाचार और विकास, और भारतीय उद्योगों के उन्नयन के लिए बाधाओं और चुनौतियों के साक्ष्य का उपयोग नवाचार परिणामों और लाभों को मजबूत करने के लिए नीतियों, कार्यक्रमों और साझेदारी को तैयार करने के लिए किया जाएगा।”
डॉ. रेने वैन बर्केल, प्रतिनिधि और प्रमुख, भारत में क्षेत्रीय कार्यालय, यूएनआईडीओ ने कहा “एनएमआईएस सर्वेक्षण से पता चलता है कि विनिर्माण में नवाचार अभी तक आम नहीं है लेकिन फर्मों के लिए लाभदायक साबित हुआ है। उत्पादन के विस्तार के अलावा विनिर्माण नवाचार पर ध्यान देने की आवश्यकता है।”
एनएमआईएस 2021- 22 सर्वेक्षण में दो विशिष्ट घटक थे : फर्म-स्तरीय सर्वेक्षण और नवाचार सर्वेक्षण की क्षेत्रीय प्रणाली (एसएसआई)।
फर्म-स्तरीय सर्वेक्षण ने फर्मों द्वारा किए गए नवाचारों के प्रकार और अभिनव उपायों से संबंधित ऐसे डेटा पर पकड़ बनाई जिसमें नवाचार की प्रक्रिया, वित्त तक पहुंच, संसाधन और नवाचार के लिए जानकारी शामिल है, इसके अलावा किसी एक फर्म में नवाचार गतिविधियों को प्रभावित करने वाले कारकों को भी रिकॉर्ड किया गया है । चार में से एक फर्म ने अवलोकन अवधि में एक नवाचार को सफलतापूर्वक लागू किया था, और इनमें से 80% से अधिक फर्में बाजारों और उत्पादन के विस्तार और लागत को कम करने में महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित हुईं ।
नवाचार सर्वेक्षण की क्षेत्रीय प्रणाली (सेक्टोरियल सर्वे ऑफ़ इन्नोवेटिव्स – एसएसआई) ने विनिर्माण नवाचार प्रणाली और फर्मों में नवाचारों को प्राप्त करने में इसकी सक्षम भूमिका का मानचित्रण (मैपिंग) किया। एसएसआई अध्ययन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पांच प्रमुख विनिर्माण क्षेत्रों – कपड़ा; खाद्य और पेय पदार्थ; मोटर वाहन; औषधि (फार्मा) ; और आईसीटी का मानचित्रण में नवोन्मेष पारिस्थितिकी तंत्र के हितधारकों, नवोन्मेष के सापेक्ष बाधाओं के साथ-साथ चुनिंदा देशों में वर्तमान नीति उपकरणों के अभिसरण या विचलन (कन्वर्जेन्स / डाइवरजेन्स) को मापाI
फर्म-स्तरीय इस सर्वेक्षण में कुल 8,087 फर्मों ने भाग लिया, जबकि एसएसआई सर्वेक्षण में 5,488 फर्मों और गैर-फर्मों ने भाग लिया। फर्म-स्तरीय सर्वेक्षण के निष्कर्षों को ‘भारतीय विनिर्माण में फर्म-स्तरीय नवाचार का आकलन’ में शामिल किया गया है। मोटर वाहन (ऑटोमोटिव)इर्मन, औषधि उद्योग (फार्मास्युटिकल), वस्त्र (टेक्सटाइल), खाद्य एवं पेय पदार्थ (फूड एंड बेवरेजेज), और सूचना एवं संवाद प्रौद्योगिकियां (इंफॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजीज – आईसीटी) जैसे पांच विनिर्माण क्षेत्रों के भीतर नवाचार की क्षेत्रीय प्रणालियों के अध्ययन से अलग से पांच रिपोर्टें विकसित की गई हैं।
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