स्टील स्लैग इस्पात उत्पादन के दौरान लोहे के अयस्क से प्राप्त हुए ठोस अपशिष्ट के रूप में उत्पन्न होता है। एकीकृत इस्पात संयंत्रों में प्रत्येक एक टन इस्पात उत्पादन के दौरान लगभग 180-200 किलोग्राम स्टील स्लैग उत्पन्न होता है, जो वार्षिक रूप से लगभग 15 मिलियन टन स्टील स्लैग उत्पादन के बराबर ही होता है।
इस्पात मंत्रालय ने इस्पात उद्योग के सहयोग से CSIR-CRRI द्वारा “सड़क निर्माण में स्टील स्लैग के इस्तेमाल के लिए निर्माण संबंधी दिशानिर्देशों एवं विशिष्टताओं के विकास” पर एक अनुसंधान एवं विकास परियोजना को वित्त पोषित किया है। इस अनुसंधान एवं विकास परियोजना के तहत, राष्ट्रीय राजमार्ग-6 को हजीरा बंदरगाह से जोड़ने वाली भारत की छह लेन वाली पहली स्टील स्लैग आधारित सड़क का निर्माण मई, 2022 में सूरत हजीरा में बिटुमिनस फुटपाथ की सभी परतों में प्राकृतिक घटक के विकल्प के रूप में प्रसंस्कृत स्टील स्लैग का उपयोग किया जाता है। इस एक किलोमीटर लंबे परीक्षण खंड में, हजीरा में आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील (एएमएनएस) इस्पात संयंत्र से संसाधित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएफ)/कॉनार्क स्लैग का उपयोग किया गया है।
CSIR-CRRI द्वारा तैयार उपरोक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजना के हिस्से के रूप में विकसित स्टील स्लैग आधारित सड़कों के निर्माण के लिए मसौदा दिशानिर्देशों को भारतीय सड़क कांग्रेस और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के साथ साझा किया गया है। सड़क बनाने वाली एजेंसियां उक्त दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिए जाने पर तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता के आधार पर संसाधित स्टील स्लैग का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होंगी।
इस्पात राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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