राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेहद कम आवाजाही वाले कुछ हिस्सों को छोड़ कर सभी जगह फास्टैग प्रणाली से युक्त शुल्क वसूली प्लाजा मौजूद हैं। आज राज्यसभा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर 816 शुल्क प्लाजा संचालित किए जा रहे हैं। नितिन गडकरी के अनुसार राजमार्ग प्रयोक्ताओं से, निविदाओं के जरिए चुनी गई एजेंसी राजस्व इकट्ठा करती हैं। इस राशि को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के खाते में जमा किया जाता है, जिसे भारत के समेकित कोष में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसके बाद, संचित निधि में से राजस्व को बजट घोषणा के अनुसार आवंटित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के अनुसार सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजनाओं के मामले में शुल्क रियायत की अवधि पूरी होने के बाद 40 प्रतिशत कम दरों पर केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किया जाता है। सार्वजनिक वित्त पोषित परियोजनाओं के मामले में परियोजना की पूंजीगत लागत की वसूली के बाद उपयोगकर्ता शुल्क दरों को घटाकर 40 प्रतिशत किया जाता है। उन्होंने कहा कि निजी निवेश परियोजनाओं के मामले में, शुल्क प्लाजा से रियायतग्राही द्वारा इकट्ठे राजस्व को संबंधित रियायत समझौते के अनुसार भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में रखा या स्थानांतरित किया जाता है।
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