राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बंधुआ मजदूरी पर नये परामर्श जारी किये हैं। इनमें कहा गया है कि राज्य और जिला स्तर के अधिकारी ईंट भट्टों के मजदूरों तक ही सीमित नहीं रहें बल्कि विनिर्माण से जुडे उद्योगों, शॉपिंग मॉल, कॉल सेंटर और मसाज पार्लर जहां बंधुआ मजदूरी का काम होता है, उनकी तरफ भी ध्यान दें। आयोग ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को उन परिवारों की पहचान करने को भी कहा है जो अत्यधिक मुश्किल परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं ताकि उन्हें बंधुआ मजदूरी की कुरीति से बचाया जा सके। आयोग ने कहा कि राज्य सरकारों को कमजोर और वंचित वर्ग के लोगों को मुफ्त राशन, स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। आयोग ने केंद्र से ई-श्रम पोर्टल पर अनियमित श्रमिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए भी कहा है।
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