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राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) ने उपभोक्ता शिकायतों के समाधान के लिए 1000 से अधिक कंपनियों के साथ साझेदारी की

एक महत्वपूर्ण सुधार में, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) ने शिकायतों के समाधान में तेजी लाने के लिए अपने कन्वर्जेंस कार्यक्रम के तहत 1000 से अधिक कंपनियों के साथ साझेदारी की। ये कंपनियां ई-कॉमर्स, यात्रा और पर्यटन, निजी शिक्षा, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, खुदरा दुकानें, ऑटोमोबाइल, डीटीएच व केबल सेवाएं और बैंकिंग समेत प्रमुख क्षेत्रों में फैली हुई हैं। इन कन्वर्जेंस कंपनियों से जुड़ी शिकायतें ऑनलाइन समाधान के लिए सीधे उनके पास स्थानांतरित कर दी जाती हैं।

कन्वर्जेंस साझेदारों की संख्या 2017 में 263 कंपनियों से लगातार बढ़कर अब 1009 कंपनियों तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी हेल्पलाइन की दक्षता बढ़ाने, त्वरित और प्रभावी शिकायत निवारण को सक्षम करने और पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में इन साझेदारों की भूमिका पर प्रकाश डालती है। साझेदारियां यह सुनिश्चित करती हैं कि उपभोक्ता शिकायतों का निपटान मामले के पहले स्तर पर ही कर लिया जाए, जिससे उपभोक्ता के भरोसे में बढ़ोतरी हो। हालांकि, यदि कोई शिकायत नहीं सुलझती, तो उपभोक्ताओं को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उचित उपभोक्ता आयोग से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

भारत सरकार का उपभोक्ता मामले विभाग (डीओसीए) शिकायत निवारण प्रक्रिया में सुधार के लिए नियमित रूप से शिकायत डेटा को मॉनीटर करता है। हाल ही में, विभाग ने शीर्ष दस नॉट-कन्वर्जेंस कंपनियों की पहचान की है, जिन्हें मौजूदा वित्तीय वर्ष (2024-25) के दौरान सबसे अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन कंपनियों में डेल्हिवरी लिमिटेड, इलेक्ट्रॉनिक्सकॉम्प.कॉम, डोमिनोज पिज्जा, हेयर अप्लायंसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फर्स्टक्राई.कॉम, थॉमसन इंडिया, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रैपिडो, ओरिएंट इलेक्ट्रिक लिमिटेड और सिंफनी लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों के साथ चल रही शिकायतों पर चर्चा करने, उन्हें संबोधित करने और उन्हें कन्वर्जेंस पार्टनर के रूप में शामिल करने के लिए अगले सप्ताह एक बैठक निर्धारित है।

एनसीएच के तकनीकी परिवर्तन से इसकी कॉल-हैंडलिंग क्षमता में सार्थक बढ़ोतरी हुई है। एनसीएच की ओर से प्राप्त कॉलों की संख्या जनवरी 2015 में 14,795 कॉल से जनवरी 2024 में 1,41,817 कॉल तक लगभग दस गुना बढ़ गई है। यह तेज बढ़ोतरी अपनी शिकायतें दर्ज करने के लिए हेल्पलाइन का उपयोग करने में उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे को दिखाती है। प्रति माह दर्ज की जाने वाली शिकायतों की औसत संख्या 2017 में 37,062 से बढ़कर 2024 में 1,12,468 हो गई है।

शिकायत निवारण प्रणाली में और सुधार के लिए, एनसीएच 2.0 पहल के हिस्से के तौर पर एनसीएच एक एआई-आधारित बोली की पहचान, एक अनुवाद प्रणाली और एक बहुभाषी चैटबॉट शुरू करने की प्रक्रिया में है। इस तकनीकी अद्यतन का उद्देश्य शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया को अधिक सहज, कुशल और समावेशी बनाना है।

एआई-संचालित बोली की पहचान और अनुवाद प्रणाली उपभोक्ताओं को मानवीय हस्तक्षेप को कम करते हुए, उनकी स्थानीय भाषाओं में बोलने के माध्यम से शिकायत दर्ज करने की अनुमति देगी। बहुभाषी चैटबॉट त्वरित समय सहायता प्रदान करके, मानवीय डेटा भरने को कम करके और समग्र उपयोगकर्ता अनुभव को बढ़ाकर शिकायत को निपटाने की प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित करेगा।

ये बदलाव यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी भाषाई पृष्ठभूमि के उपभोक्ताओं को शिकायत निवारण प्रणाली तक समान पहुंच प्राप्त हो। उपभोक्ता मामले विभाग चिंतामुक्त, त्वरित और किफायती प्रभावी शिकायत समाधान प्रक्रिया उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। एनसीएच 2.0 पहल के अंतर्गत जेनरेटिव एआई, बोली को समझने, अनुवाद और चैटबॉट प्रौद्योगिकियों की शुरूआत मामले के पहले चरण में उपभोक्ता संरक्षण में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।

विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) को नया रूप दिया है, जिससे यह पूरे भारत में उपभोक्ताओं के लिए मामले के पहले चरण में शिकायत निवारण के लिए पहुंच का केंद्रीय बिंदु बन गया है। यह हेल्पलाइन हिंदी, अंग्रेजी, कश्मीरी, पंजाबी, नेपाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मैथिली, संथाली, बंगाली, उड़िया, असमिया और मणिपुरी समेत 17 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे सभी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से अपनी शिकायतें दर्ज करने की सुविधा मिलती है। शिकायतों को एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र (इनग्राम) पोर्टल पर भी दर्ज किया जा सकता है, जो एक केंद्रीकृत आईटी-सक्षम प्रणाली है और व्हाट्सऐप, एसएमएस, ईमेल, एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल और उमंग ऐप जैसे चैनल पर शिकायतें दर्ज करने की सुविधा प्रदान करती है।

एक बार शिकायतें प्राप्त होने पर, एनसीएच उन्हें समाधान के लिए संबंधित कंपनियों, नियामकों या सरकारी विभागों को भेज देता है।

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