राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आईएफएफआई के 53वें संस्करण की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
एशिया के सबसे पुराने फिल्म समारोहों में से एक के आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए, राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को बढ़ावा देने में आईएफएफआई के योगदान की चर्चा की। राष्ट्रपति ने कहा कि यह महोत्सव दक्षिण एशिया में फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, उद्योग के व्यावसायियों और सिनेमा प्रेमियों के लिए मिलने के एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम कर रहा है जहां वे विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और अपने समृद्ध अनुभव साझा कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने रचनात्मकता और मनोरंजन के माध्यम के रूप में सिनेमा के मूल्य की चर्चा की। सिनेमा एक ऐसा माध्यम है जो दृश्य, ध्वनि और कहानी कहने की तकनीकों का गतिबोधक प्रभावशाली प्रदर्शन करता है। राष्ट्रपति ने कहा, उन्हें यकीन है कि आईएफएफआई का 53वां संस्करण समारोह के सभी प्रतिनिधियों को चलचित्र संबंधी अद्वितीय अनुभव प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत का अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, आईएफएफआई, विभिन्न देशों और समाजों के प्रतिनिधियों के बीच सिनेमा द्वारा एकजुट स्फूर्ति के साथ मिलकर कार्य करने से प्राप्त सफलता को बढ़ावा देता है। आईएफएफआई को भारत का सबसे बड़ा फिल्म महोत्सव बताते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि “गोवा में एकत्रित होने वाली इस छोटी सी दुनिया को आपस में बातचीत से कला की दुनिया को गहराई से समझने और नई चीजें सीखने का अवसर मिलेगा”।
अपने संदेश में, प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएफएफआई और भारतीय सिनेमा ने वैश्विक मंच पर अपने लिए एक जगह बनाई है। “विभिन्न भारतीय भाषाओं की फिल्में बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंच रही हैं और दुनिया भर में इसकी अत्यधिक सराहना की जा रही है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिनेमा की भूमिका विचार प्रकट करने के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का अध्ययन है। “अब एक सदी से अधिक समय से, सिनेमा ने दुनिया भर में लोगों की कल्पना पर कब्जा कर लिया है। सिनेमा हमारे समय के सामाजिक बदलाव को दर्शाता है और साथ ही इसे आकार देता है।”
प्रधानमंत्री ने सामाजिक परिवर्तन लाने में फिल्मों के कथानक की शक्ति और भारतीय भाषाओं में कहानी कहने के समृद्ध इतिहास तथा कला की भी चर्चा की। “फिल्मों में बाधाओं को पार करने और दर्शकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की अनूठी क्षमता होती है। फिल्में लोगों का मनोरंजन करती हैं, उन्हें शिक्षित करती हैं या अपनी शक्तिशाली कहानी के माध्यम से उन्हें प्रेरित भी करती हैं। सामाजिक बदलाव का वाहक बनने की उनकी क्षमता वास्तव में अद्वितीय है। भारत भाग्यशाली है कि उसके पास आधुनिक के साथ परम्परा की एक समृद्ध और विविध संस्कृति है। गद्य, कविता, संगीत, नृत्य, नाटक, ड्रामा से लेकर सिनेमा तक विभिन्न भारतीय भाषाओं में इतिहास और कथानक बताने की कला हमें हमारे जीवंत सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य का जश्न मनाने में सक्षम बनाती है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि गोवा महोत्सव के लिए एक आदर्श स्थान है और यह फिल्म समारोह में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को नए विचारों के साथ आने के लिए प्रेरित करेगा ताकि सिनेमा लगातार बढ़ते दर्शकों तक पहुंच सके। “अपनी खूबसूरत प्रकृति और जीवंत संस्कृति के साथ, गोवा आईएफएफआई की मेजबानी के लिए सही पृष्ठभूमि प्रदान करता है। मुझे विश्वास है कि गोवा प्रतिभागियों की रचनात्मक कल्पना को प्रोत्साहित करेगा, उन्हें नए विचारों के साथ आने के लिए प्रेरित करेगा ताकि सिनेमा को लगातार बढ़ते दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाने में मदद मिल सके।”
प्रधानमंत्री ने आईएफएफआई के 53वें संस्करण की शानदार सफलता की कामना की।
Kal Ka Rashifal 19 July 2026: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से बदलेगा दिन, जानें मेष… Read More
भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड… Read More
ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट टीम की बड़ी चुनौती, नए सीजन में जीत की लय बरकरार रखने पर… Read More
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को बड़ी सौगात, 12 राज्यों को ₹10,021 करोड़ जारी नई दिल्ली:… Read More
बांग्लादेश बनाम जिम्बाब्वे: दूसरे टी20 में सीरीज बचाने उतरेगा बांग्लादेश, जिम्बाब्वे की नजर सीरीज जीत… Read More
पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए मूल्य स्थिरीकरण कोष के इस्तेमाल की मांग… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment