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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने AIIMS राजकोट के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान, राजकोट के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, जो संस्थान की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इस अवसर पर इसके पहले बैच के मेडिकल छात्रों ने स्नातक किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित थीं।

स्नातक हो रहे छात्रों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने इस अवसर को न केवल छात्रों के लिए, बल्कि संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी लोगों के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, “आप इस संस्थान से स्नातक होने वाला पहला बैच हैं। इस दृष्टि से आप एम्स राजकोट के पहले ब्रांड एंबेसडर हैं। आपका कार्य और आचरण इस संस्थान की प्रतिष्ठा को आकार देगा।”

राष्ट्रपति ने सौराष्ट्र क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को उजागर करते हुए इसके पवित्र स्थलों और महात्मा गांधी के जीवन से इसके संबंध का उल्लेख किया। उन्होंने एम्स राजकोट के सभी हितधारकों से सेवा और लोककल्याण की भावना के साथ, कर्तव्य और करुणा के आदर्शों से प्रेरित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

चिकित्सा के पेशे की उदारता की प्रकृति पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा के प्रति एक प्रतिबद्धता है। इस पेशे में केवल वैज्ञानिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और विनम्रता भी आवश्यक है।” उन्होंने स्नातक हो रहे छात्रों से अपने कार्य में सहानुभूति, धैर्य और विनम्रता बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि “आप जो सफेद कोट पहनते हैं, वह उस विश्वास का प्रतीक है जो लोग बीमारी और अनिश्चितता के समय डॉक्टरों पर करते हैं।”

राष्ट्रपति ने एम्स संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे सस्ती और विश्वस्तरीय तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और जन स्वास्थ्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि एम्स के स्नातक भारत और विदेशों में स्वास्थ्य क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं, जो इन संस्थानों के उच्च मानकों को दर्शाता है।

एम्स राजकोट का एक उभरते हुए संस्थान के रूप में उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने इसकी दीर्घकालिक सफलता के लिए स्पष्ट दृष्टि, सुशासन और पारदर्शिता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने क्षेत्र-विशिष्ट स्वास्थ्य चुनौतियों—जैसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा सिकल सेल एनीमिया जैसे आनुवंशिक विकारों—से निपटने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से हो रही तकनीकी प्रगति को स्‍वीकार करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन और डिजिटल हेल्थ सेवाएं स्वास्थ्य सेवा की प्रकृति और संभावनाओं को बदल रही हैं।” उन्होंने छात्रों को नवाचार को अपनाने के लिए प्रेरित किया, साथ ही कहा कि “चिकित्सा में मानवीय करुणा का कोई विकल्प नहीं हो सकता।” महात्‍मा गांधी का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ने स्नातकों को सेवा के महत्व की याद दिलाई: “अब जब आपको सेवा करने का अवसर मिला है, तो उसमें अपना पूरा मन लगाएं और उससे पूर्ण संतोष प्राप्त करना सीखें।”

राष्ट्रपति ने चिकित्सा अभ्यास में नैतिक मूल्यों के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि एक अच्छा डॉक्टर होना महत्वपूर्ण है, लेकिन करुणा, ईमानदारी और परोपकार जैसे मूल्यों से प्रेरित होना उससे भी अधिक आवश्यक है।

भारत के 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं इसका एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने इस दिशा में अनेक कदम उठाए हैं और एम्स जैसे प्रमुख संस्थानों सहित सभी हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

एम्स राजकोट के भविष्य को लेकर विश्वास व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह संस्थान समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने तथा चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में नए मानक स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति ने स्नातक हो रहे छात्रों को शुभकामनाएं दीं और उनसे समर्पण के साथ सेवा करने, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करने तथा चिकित्सा पेशे के महान आदर्शों को बनाए रखने का आग्रह किया।

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