संसद ने परिवार न्यायालय संशोधन विधेयक 2022 पारित कर दिया है। राज्यसभा ने आज सदन में हंगामे के बीच इस विधेयक को स्वीकृति दी। लोकसभा पहले ही विधेयक को मंजूरी दे चुकी है। इससे परिवार न्यायालय अधिनियम, 1984 में संशोधन का प्रावधान है। विधेयक राज्य सरकारों को परिवार न्यायालय स्थापित करने की अनुमति देता है। केंद्र सरकार को विभिन्न राज्यों में अधिनियम के लागू होने की तारीखों को अधिसूचित करने का अधिकार है। हिमाचल प्रदेश और नगालैंड की सरकारों ने अधिनियम के तहत अपने राज्यों में परिवार न्यायालय स्थापित की हैं।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए विधि और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने परिवार से संबंधित होने के कारण इस विधेयक को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने परिवार न्यायालयों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया। किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार ने राज्यों और उच्च न्यायालयों से देश के प्रत्येक जिले में परिवार न्यायालय स्थापित करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि 715 अदालतों में 11 लाख मामले लंबित हैं और केंद्र ने न्यायपालिका से उन्हें निपटाने का आग्रह किया है। किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार अदालतों को बुनियादी ढांचा और अन्य सहायता प्रदान कर रही है।
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