राज्यसभा ने ऐतिहासिक बांध सुरक्षा विधेयक (2019) को पारित कर दिया, जिससे देश में बांध सुरक्षा अधिनियम को लागू करने का रास्ता तैयार हो गया है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस विधेयक को एक दिसंबर 2021 को राज्यसभा में पेश किया था। बांध सुरक्षा विधेयक (2019) को लोकसभा में 2 अगस्त 2019 को पारित किया गया था।
चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है, जहाँ बांधों की संख्या सबसे ज़्यादा है। हमारे देश में करीब 5,700 बड़े बांध हैं, जिनमें से करीब 80% बांध 25 वर्ष से भी ज़्यादा पुराने हैं। देश में करीब 227 ऐसे बांध हैं, जो 100 वर्ष से भी अधिक पुराने हैं और आज भी कार्यरत हैं। वैसे तो भारत में बांध सुरक्षा का ट्रैक रिकॉर्ड विकसित देशों के समकक्ष रहा है, लेकिन कई ऐसे उदाहरण हैं, जब देश ने असमय बांध के फेल हो जाने और बांध के रखरखाव की दयनीय स्थिति जैसी समस्याओं का सामना किया है।
बांध सुरक्षा विधेयक देश के सभी बड़े बांधों की निगरानी, निरीक्षण, परिचालन और रखरखाव संबंधी पर्याप्त सुविधा प्रदान करेगा, ताकि बांध के फेल होने की स्थिति में होने वाली आपदा को रोका जा सके। बांधों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संरचनात्मक और गैर-संरचनात्मक उपायों की दिशा में यह विधेयक केन्द्र और राज्य दोनों स्तरों पर एक संस्थागत तंत्र की व्यवस्था प्रदान करेगा।
विधेयक के प्रावधान के अनुसार, एकसमान बांध सुरक्षा नीतियां, प्रोटोकॉल और प्रक्रियाओं को विकसित करने में मदद करने के लिए बांध सुरक्षा पर एक राष्ट्रीय समिति (एनसीडीएस) का गठन किया जाएगा। यह विधेयक बांध सुरक्षा नीतियां और मानकों के राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक नियामक संस्था के तौर पर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) स्थापित करने की सुविधा भी प्रदान करता है। वहीं इस विधेयक में राज्यों के स्तर पर बांध सुरक्षा पर राज्य समिति (एससीडीएस) का गठन करने और राज्य बांध सुरक्षा संगठन स्थापित करने की व्यवस्था की गई है।
बांध सुरक्षा विधेयक से जलवायु परिवर्तन के कारण पैदा हुई चुनौतियों के चलते बांध सुरक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं का व्यापक स्तर पर समाधान निकालने में मदद मिलेगी। यह विधेयक बांधों के नियमित निरीक्षण और जोखिम संबंधी वर्गीकरण की व्यवस्था करता है।इस विधेयक में विशेषज्ञों के एक स्वतंत्र पैनल द्वारा आपातकालीन कार्य योजना बनाने और बांध सुरक्षा की व्यापक स्तर पर समीक्षा करने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक में नदी के प्रवाह की दिशा में रहने वाले निवासियों की सुरक्षा संबंधी चिंताको दूर करने के लिए एक आपातकालीन बाढ़ चेतावनी प्रणाली का प्रावधान किया गया है।
इस विधेयक के अंतर्गत अब बांध मालिकों को ज़रूरी मशीनरी प्रदान करने के लिए अलावा निर्धारित समय पर बांध की मरम्मत और रखरखाव के लिए ज़रूरी संसाधन भी प्रदान करने होंगे।
यह विधेयक बांध सुरक्षा को समग्रता के साथ देखता है। यह विधेयक न केवल बांधों के संरचनात्मक पहलुओं की बात करता है, बल्कि सख्त परिचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम)प्रोटोकॉलके माध्यम से परिचालन और रखरखाव संबंधी प्रभावशीलता को बढ़ाने की दिशा में भी काम करता है।
इस विधेयक में शामिल प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए दंडात्मक प्रावधानों की व्यवस्था की गई है, जिनमें अपराध और उसकी सज़ा शामिल हैं।
इस विधेयक में केन्द्र और राज्य दोनों के सहयोग से एक मज़बूत संस्थागत ढांचे को स्थापित करने के लिए निश्चित समय सीमा की व्यवस्था की गई है। यह विधेयक एक निश्चित समय सीमा में बांध मालिकों द्वारा अनिवार्य बांध सुरक्षा उपायों को लागू करने पर भी ध्यान केन्द्रित करता है। इस विधेयक का पारित होना भारत में बांध सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के एक नए युग की शुरुआत करता है।इस विधेयक के पारित होने से भारत में बांध सुरक्षा और जल संसाधन प्रबंधन के एक नए युग की शुरुआत हुई है।
National Film Awards 2026: ‘आर्टिकल 370’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म, कार्तिक आर्यन और ममूटी को मिला… Read More
RBI ने पॉलिमर नोटों की दिशा में बढ़ाया कदम, ₹10 और ₹20 के नोटों से… Read More
AIBE 21 (XXI) 2026: बार काउंसिल जल्द जारी कर सकती है नोटिफिकेशन, जानें रजिस्ट्रेशन और… Read More
Skyroot Aerospace ने अंतरिक्ष मिशनों को दी नई रफ्तार, निजी स्पेस सेक्टर में भारत की… Read More
Kal Ka Rashifal 19 July 2026: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से बदलेगा दिन, जानें मेष… Read More
भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment