राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोटा में कोचिंग विद्यार्थियों में आत्महत्या के बढते मामलों को देखते हुए कल रात कोचिंग संचालकों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सिस्टम को सुधारने का वक्त आ गया है और हम बच्चों को मरते हुए नहीं देख सकते। कोटा में इस साल आठ महीने में 21 बच्चों ने आत्महत्या कर ली है।
नीट और आइआइइटी की कोचिंग लेने के लिये देश के विभिन्न राज्यों के ढाई लाख से ज्यादा बच्चे कोटा आते है। विशेषज्ञों और पुलिस की ओर से कराये गये अध्ययन के अनुसार ज्यादातर मामलों में माता-पिता से दूर रहने और पढाई के दबाव के कारण बच्चे टूट जाते हैं। और आत्माहत्या का कदम उठाते हैं। प्रशासन की ओर से बच्चों के सहयोग के लिए विभिन्न कदम उठाये गये हैं। लेकिन वे नाकाफी साबित हुए हैं। अब सरकार और कोचिंग संस्थान बच्चों का दबाव कम करने और उन्हें खेल तथा तनावमुक्त करने वाली अन्य गतिविधियों से जोडने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं ताकि बच्चों के जीवन को बचाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव भवानी सिंह देथा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति कोचिंग छात्रों के आत्महत्या रोकने के लिए उठाये जाने वाले आवश्यक कदमों के संबंध में 15 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट सौंपेगी।
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