रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्र के हितों की रक्षा के लिए भविष्य की सैन्य रणनीतियों और प्रतिक्रियाओं में सशस्त्र बलों के बीच सक्रिय तालमेल का आह्वान किया है। वह दिनांक 25 सितंबर, 2021 को नई दिल्ली में दीक्षांत समारोह के दौरान 59वें राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (एनडीसी) कोर्स (2019 बैच) के स्नातकों को संबोधित कर रहे थे। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा विवाद और सीमा पार आतंकवाद जैसे मुद्दों पर सरकार के साहसिक दृष्टिकोण ने हाल के दिनों में भारत को मजबूत बनाया है और अब देश ने एक बड़ी वैश्विक भूमिका और जिम्मेदारी संभाली है।
राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत एक शांतिप्रिय राष्ट्र है, लेकिन जो भी इसकी अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा है, उसे मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा, “आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए खतरा अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बालाकोट और गलवान में हमारा एक्शन सभी आक्रमणकारियों के लिए स्पष्ट संकेत है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज दुनिया आतंक के अस्थिर करने वाले प्रभावों और हिंसक कट्टरपंथी ताकतों के विशेष रूप से ऐसे प्रयासों की गवाह है जिनमें ऐसी ताकतें अपने एक्शन को सामान्य बनाते हुए वैधता हासिल करने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अब जिम्मेदार देशों के बीच आतंकवाद के खतरे के खिलाफ एक साथ खड़े होने का व्यापक अहसास है। उन्होंने कहा कि एनडीसी आतंकवाद के खिलाफ मित्र देशों के बीच एक आम समझ को बढ़ावा देने और इस खतरे से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अफगानिस्तान की स्थिति पर अपने विचार साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि इस घटनाक्रम ने हमारे समय की वास्तविकता को उजागर किया है। उन्होंने कहा, “बदलती भू-राजनीति के बारे में एकमात्र निश्चितता इसकी अनिश्चितता है। देश की सीमाओं में परिवर्तन आज की तरह नहीं हो सकता है। हालांकि, देशों की तेजी से बदलती संरचना और बाहरी शक्तियों का उस पर प्रभाव स्पष्ट रूप से ज़ाहिर है।” रक्षा मंत्री ने अफगानिस्तान की स्थिति से फिलहाल इस क्षेत्र में और इसके बाहर तात्कालिक रूप से महसूस किए जा रहे शोरशराबे से परे सबक लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा, “जब इन घटनाओं को देखा जाता है, तो यह विश्वास करने में आता है कि आतंकवाद, भय, मध्ययुगीन विचार एवं कार्य, लिंग के आधार पर भेदभाव, असमानता और हठधर्मिता में छिपी प्रथाएं, लोगों की कामनाओं, बहुलवादी विचार एवं समावेशी संरचनाओं को किनारे कर सकती हैं। वास्तविकता से दूर कुछ भी नहीं हो सकता। और मानव इतिहास इस संबंध में एक महान शिक्षक है। अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, मानव अस्तित्व में निहित अच्छाई की सामूहिक शक्ति को न तो हरा सकता है और न ही हरा पाएगा। यह भावना विश्व में उन राजधानियों की बढ़ती संख्या से स्पष्ट है, जिन्होंने उदारवाद, समावेशिता और शासन व व्यवहार के अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के सम्मान के हक में अपनी आवाज उठाई है ।”
रक्षा मंत्री ने एनडीसी को साइबर, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसे नए और तेजी से उभरते क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “दुनिया ने वैज्ञानिक ज्ञान के इन सभी क्षेत्रों में तेजी से परिवर्तन देखा है। यह तकनीकी प्रगति सामरिक समुदाय के भीतर इसकी सैन्य व्याख्या के साथ होनी चाहिए।”
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (दुनिया एक परिवार है) वाक्यांश का उल्लेख करते हुए, रक्षा मंत्री ने देश और विश्व स्तर पर खतरों से निपटने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण बनाने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, आतंकवाद के खिलाफ हो या साइबर चुनौतियों के खिलाफ, राष्ट्रीय विविधताओं को एकजुट करने से ही सफलता मिल सकती है। उन्होंने हाल के दिनों में कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को विविधता में एकता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का एक शानदार उदाहरण बताया।
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि कोई भी देश जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित होने की इच्छा रखता है, वह रक्षा आयात पर इस तरह की निर्भरता को कायम नहीं रख सकता है।
रक्षा मंत्री ने ज्ञान, बुद्धिमता और शासन कला के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि एनडीसी के ये मार्गदर्शक सिद्धांत तेजी से बदलते क्षेत्रीय परिदृश्य में प्रमुख महत्व रखते हैं। उन्होंने कहा, “ज्ञान हमें किसी देश और क्षेत्र की ऐतिहासिक, सामाजिक, भू-राजनीतिक और आर्थिक वास्तविकताओं को समझने की अनुमति देता है। दूरदर्शी निर्णय लेने की सुविधा के लिए बुद्धि इस तथ्यात्मक समझ की व्याख्या करने में मदद करती है और शासन कला रणनीतिक सोच और संस्कृति की समझ को रोजमर्रा की वास्तविकताओं में लाती है। यह दीर्घकालिक हितों की खोज में निर्णय लेने की सुविधा प्रदान करता है।”
राजनाथ सिंह ने न केवल भारत से बल्कि विदेशों में भी कई रणनीतिक नेताओं और अभ्यासकर्ताओं के विचारों को आकार देने के लिए एनडीसी की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पाठ्यक्रम के स्नातक विद्यार्थी राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित भविष्य की सभी चुनौतियों से निपटने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित होंगे। उन्होंने इस तथ्य की सराहना की कि कॉलेज ने अपने बुनियादी ढांचे को बढ़ाया है और कोविड-19 महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद शैक्षणिक पाठ्यक्रम को फिर से तैयार किया है। उन्होंने प्रेसिडेंट्स चेयर ऑफ एक्सीलेंस की संस्था की भी सराहना की जिसने रणनीति सीखने और अकादमिक कद को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया है।
अपने स्वागत भाषण में एनडीसी कमांडेंट एयर मार्शल दीपेंदु चौधरी ने कहा कि एनडीसी पाठ्यक्रम के पूरा होने पर, स्नातक रणनीतिक स्तर पर राष्ट्रीय मुद्दों के लिए नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में एक बहु-अनुशासनात्मक और लीक से हट कर दृष्टिकोण लागू करने में सक्षम होंगे– कुछ ऐसा जो कौटिल्य ने लगभग 2,000 साल पहले सिखाया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक प्राप्त लोग व्यापक राष्ट्रीय शक्ति की अधिक समझ तथा राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका के माध्यम से एक बड़ा अंतर पैदा करने में सक्षम होंगे।
इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने पाठ्यक्रम के 41 स्नातकों को एम फिल की डिग्री प्रदान की। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष, रक्षा सामरिक अध्ययन विभाग, मद्रास विश्वविद्यालय के प्रो (डॉ.) उत्तम कुमार जमदग्नि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
एनडीसी देश की सामरिक शिक्षा का सर्वोच्च स्थान है। इस कॉलेज में प्रतिष्ठित और बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति के सभी आयामों के लिए एक अंतर-अनुशासनात्मक और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में अनुभवी वन स्टार रैंक और सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं के समकक्ष अधिकारी और मित्र देशों के अधिकारी भी शामिल हैं। एक वर्षीय पाठ्यक्रम अधिकारियों को मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एम फिल डिग्री के लिए अर्हता प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।
यहां के 3,999 पूर्व छात्रों में से अनेक छात्र अपने-अपने देशों और अपने सशस्त्र बलों के प्रमुख बनने तक आगे बढ़े हैं और उन्होंने विशिष्ट योग्यता से सेवा की है। भूटान के वर्तमान राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक एनडीसी के पूर्व छात्र हैं। भारत में एनडीसी के दो पूर्व छात्र- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत- राष्ट्रीय सुरक्षा संरचनाओं के शीर्ष पर हैं।
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