‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक प्रमुख पहल के रूप में रक्षा मंत्रालय (एमओडी) ने भारतीय नौसेना के लिए दिनांक 20 जुलाई, 2021 को प्रोजेक्ट 75 (इंडिया) P-75(I) नामक छह एआईपी फिटेड पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत पहले अधिग्रहण कार्यक्रम के लिए प्रस्ताव का अनुरोध (आरएफपी) जारी किया है। परियोजना के लिए चयनित रणनीतिक साझेदारों (एसपीएस) या भारतीय आवेदक कंपनियों जैसे मैसर्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और मेसर्स लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) को आरएफपी जारी किया गया था। इस परियोजना की लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
प्रोजेक्ट-75(I) में फ्यूल-सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन प्लांट, उन्नत टॉरपीडो, आधुनिक मिसाइल और अत्याधुनिक काउंटरमेजर सिस्टम सहित समकालीन उपकरण, हथियार और सेंसर के साथ छह आधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों (एसोसिएटेड शोर सपोर्ट, इंजीनियरिंग सपोर्ट पैकेज, प्रशिक्षण और पुर्जों सम्बंधी पैकेज समेत) के स्वदेशी निर्माण का लक्ष्य तय किया गया है। यह प्रोजेक्ट के अंतर्गत नवीनतम पनडुब्बी डिजाइन और प्रौद्योगिकियों को लाने के अलावा, भारत में पनडुब्बियों की स्वदेशी डिजाइन और निर्माण क्षमता को एक बड़ा बढ़ावा देगा।
एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (ईओआई) पर प्रतिक्रियाओं की प्राप्ति के बाद, संभावित रणनीतिक भागीदारों (एसपी) और विदेशी ओईएम की शॉर्टलिस्टिंग की गई। शॉर्टलिस्ट किए गए रणनीतिक भागीदार (एसपी) जिन्हें आरएफपी जारी किया गया है, वे किसी भी शॉर्टलिस्ट किए गए विदेशी ओईएम जैसे मैसर्स नेवल ग्रुप-फ्रांस, मैसर्स टीकेएमएस-जर्मनी, मैसर्स जेएससी आरओई-रूस, मैसर्स देवू शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड-दक्षिण कोरिया और मेसर्स नवंतिया-स्पेन के साथ सहयोग करेंगे। यह पांच विदेशी कंपनियां पारंपरिक पनडुब्बी डिजाइन, निर्माण और अन्य सभी संबंधित प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में विश्व की अग्रणी कंपनियां हैं। विदेशी ओईएम एसपी मॉडल में प्रौद्योगिकी भागीदार होंगे। विदेशी ओईएम एसपी को पनडुब्बियों के निर्माण, उच्च स्तर के स्वदेशीकरण और विभिन्न प्रौद्योगिकियों के लिए टीओटी प्राप्त करने योग्य बनाएंगे। ये ओईएम पनडुब्बी डिजाइन और अन्य प्रौद्योगिकियों के लिए टीओटी प्रदान करके भारत में इन पनडुब्बियों के लिए समर्पित विनिर्माण लाइन स्थापित करने में सक्षम होंगे और भारत को पनडुब्बी डिजाइन और उत्पादन के लिए वैश्विक केंद्र बनाएंगे।
यह परियोजना न केवल मुख्य पनडुब्बी/जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने में मदद करेगी, बल्कि पनडुब्बियों से संबंधित पुर्जों/ सिस्टम/ उपकरणों के निर्माण के लिए एक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के द्वारा विनिर्माण/ औद्योगिक क्षेत्र, विशेष रूप से एमएसएमई को भी बढ़ाएगी । इन उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए आरएफपी में प्रमुख विशेषताएं- जैसे प्लेटफार्मों के स्वदेशी निर्माण का अनिवार्यता, पनडुब्बियों और कुछ महत्वपूर्ण उपकरण और सिस्टम के डिजाइन/ निर्माण/ रखरखाव के लिए टीओटी, अन्य प्रमुख प्रौद्योगिकियों आदि के लिए इस तरह के स्वदेशीकरण हेतु भारत में एक इको-सिस्टम की स्थापना तथा प्रोत्साहन हैं ।
इसका समग्र उद्देश्य सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के लिए जटिल हथियार प्रणालियों के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए सार्वजनिक/ निजी क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं का उत्तरोत्तर निर्माण करना होगा। यह व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों को पूरा करने, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने और रक्षा क्षेत्र को सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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