रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन-डीआरडीओ आज अपना 64वां स्थापना दिवस मना रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विशेष रूप से सैन्य प्रौद्योगिकी में भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज ही के दिन 1958 में डीआरडीओ की स्थापना की गई थी। इस संगठन ने 63 वर्षों में देश के रक्षा अनुसंधान और विकास परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉक्टर जी सतीश रेड्डी ने बताया कि कोविड महामारी की कठिन परिस्थिति के बावजूद पिछला वर्ष महत्वपूर्ण सफलता और उपलब्धियों का वर्ष रहा।
कोविड महामारी की रोकथाम में डीआरडीओ की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर डॉ रेड्डी ने इस संगठन के प्रमुख कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स कोष की मदद से डीआरडीओ ने साढे आठ सौ से अधिक ऑक्सीजन संयंत्र स्थापित किए हैं और 2 डीजी दवा विकसित करने के अलावा देशभर में कई विशेष कोविड अस्पताल भी बनाए हैं।
डीआरडीओ के अध्यक्ष ने कहा कि विकास और उत्पादन के संदर्भ में रक्षा उद्योग के साथ तालमेल नई ऊंचाई पर पहुंचा है और पिछले एक वर्ष में 175 से अधिक प्रौद्योगिकियों का हस्तांतरण हुआ है।
स्वदेशी हाइपरसोनिक क्रूज पक्षेपास्त्र विकसित करने के मुद्दे पर डॉ रेड्डी ने कहा कि उनका संगठन हाइपरसोनिक प्रणाली हासिल करने तथा पांचवीं पीढी के अग्रिम लड़ाकू विमान तैयार करने के लिए प्रयास कर रहा है।
उन्होंने बताया कि डीआरडीओ ने देश के विद्यार्थियों में रक्षा अध्ययन को लोकप्रिय बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की है।
भारत को आत्मनिर्भर बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए डॉ रेड्डी ने भविष्य में रक्षा अनुसंधान तथा उत्पादन क्षेत्र में भारत को विश्व में अग्रणी बनाने और रक्षा उपकरणों का प्रमुख निर्यातक बनाने संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई।
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