सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) ने उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एससी-एसटी हब और मंत्रालय की अन्य योजनाओं के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मेघालय के शिलांग में आज एक मेगा सम्मेलन का आयोजन किया।
इस अवसर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में सचिव एस. सी. एल. दास और मेघालय औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (एमआईडीसी) के अध्यक्ष जेम्स पी. के. संगमा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस आयोजन में मेघालय के लगभग 600 एससी-एसटी आकांक्षी और विद्यमान उद्यमियों की भागीदारी देखी गई।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए जेम्स पी. के. संगमा ने जोर देकर बताया कि सम्मेलन से राज्य में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों को किस प्रकार लाभ होगा ताकि वे अपने उद्यमों की शुरूआत कर सकें और उनका विस्तार कर सकें तथा भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दे सकें। उन्होंने इस लक्ष्य को अर्जित करने के लिए मेघालय सरकार के 30 अरब डॉलर के योगदान के विजन का उल्लेख किया। उन्होंने शिलांग में एनएसएसएच सम्मेलन आयोजित करने के लिए एमएसएमई मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया, जो राज्य में सरकारी योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाएगा।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए एस. सी. एल. दास ने सकल घरेलू उत्पाद और समग्र निर्यात में योगदान के संदर्भ में भारतीय अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एमएसएमई न केवल रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करते हैं, बल्कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के औद्योगिकीकरण में भी मदद करते हैं। उन्होंने उद्यमिता के लाभों को रेखांकित किया और मेघालय के प्रतिभागी युवाओं से उद्यमिता को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने और केवल एक उपभोक्ता बनने के बजाय एक उत्पादक बनने का आग्रह किया। उन्होंने एमएसएमई क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं की क्षमता को भी रेखांकित किया और कहा कि इस कॉन्क्लेव के माध्यम से, राज्य के एससी/एसटी उद्यमी नवोन्मेषी विचारों, व्यापार के अवसरों की खोज करेंगे और इन योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएंगे।
एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव मर्सी एपाओ ने मंत्रालय की अन्य प्रमुख योजनाओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों के लिए राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना के तहत लागू की गई विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी। डॉ इशिता गांगुली त्रिपाठी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र पर मंत्रालय के फोकस पर प्रकाश डालते हुए एक प्रस्तुति दी। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में शुरू की गई “पीएम विश्वकर्मा” योजना पर भी प्रकाश डाला।
सीपीएसई, बैंकों और ऋण देने वाले संस्थानों के साथ एक विशेष तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया था, जिसके ज़रिएआकांक्षी और विद्यमान एससी-एसटी उद्यमियों के लिए एक परस्पर संवादमूलक मंच प्रदान किया गया। पावरग्रिड, नीपको, एफसीआई, आईओसीएल और हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन जैसे सीपीएसई ने अपनी सूचीबद्धता प्रक्रिया पर प्रस्तुतियां दीं और एससी-एसटी स्वामित्व वाले एमएसई से खरीदे जा सकने वाले उत्पादों/सेवाओं का विवरण साझा किया। इस कार्यक्रम में सिडबी, केनरा बैंक, एचडीएफसी बैंक, मेघालय ग्रामीण बैंक, इंडसइंड बैंक, आईएफडीसी आदि जैसे वित्तीय संस्थान भी थे, जिन्होंने एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित विभिन्न ऋण योजनाओं का विवरण दिया। एनएसएफडीसी और जीईएम जैसे अन्य सरकारी निकायों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया और एमएसएमई के लिए अपनी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में पीएम विश्वकर्मा नामांकन के लिए सीएससी शिलांग के सुविधा डेस्क और एससी/एसटी एमएसई प्रतिभागियों के तत्काल पंजीकरण की सुविधा के लिए उदयम पंजीकरण शामिल था।
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