महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि राज्य में पिछले कुछ दिनों से अभूतपूर्व बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। मुम्बई में समीक्षा बैठक के बाद उद्धव ठाकरे ने संवाददाताओं से कहा कि प्रतिकूल मौसम ने सरकार को बाढ़ की नई परिभाषा तय करने के लिए विवश कर दिया है। उन्होंने कहा कि अभी तक बाढ़ से नुकसान का आकलन नहीं किया जा सका है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि एनडीआरएफ की टीमें तथा तीनों सेनाओं तथा तटरक्षक बल को राहत और बचाव कार्यों में मदद करने के लिए कहा गया है। लोगों का जीवन बचाने को प्राथमिकता बताते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि राहत शिविरों में जल्द से जल्द मास्क, जलजनित रोगों से निपटने के लिए दवाएं, भोजन के पैकेट और पानी की बोतलें भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास मंत्री विजय वाडेट्टिवार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 42 हो गई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण विभिन्न गांवों से सम्पर्क कटा हुआ है और अधिकारी वहां तक पहुंचने के प्रयास कर रहे हैं इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने मौसम विभाग के हवाले से कहा कि सातारा, कोल्हापुर और रत्नागिरि जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। कोल्हापुर और आसपास के क्षेत्रों में बचाव कार्यों में सहायता के लिए एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें भेजी जा रही हैं। विजय वाडेट्टिवार ने कहा कि बाढ़ से अनेक सड़कें और पुल बह गए हैं और कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे एनडीआरएफ की टीमों को भी प्रभावित गांवों तक पहुंचने में मुश्किलें आ रही हैं। बचाव टीमों और राहत सामग्री को विमान के जरिए भेजने को प्राथमिकता दी जा रही है।
इससे पहले, रायगढ़ जिले की कलेक्टर निधि चौधरी ने बताया कि भूस्खलन के कारण जिले में कुल 36 लोग मारे गए हैं, जबकि छत्तीस लोगों के फंसे होने की आशंका है।
मुम्बई-बेंगलुरू राजमार्ग बंद होने और कोंकण रेलवे के चिपलुन तथा कमाठे के बीच रेल यातायात ठप्प होने के कारण सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित है।
महाराष्ट्र के बाढ़ प्रभावित जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल- एनडीआरएफ की 18 टीमें तैनात की गई हैं। इन जिलों में मुंबई, रत्नागिरि, ठाणे और रायगढ़ शामिल हैं। ये टीमें राज्य प्रशासन से सलाह मशविरे के बाद राहत और बचाव कार्यों के लिए तैनात की गई हैं। कुछ और टीमें हाई एलर्ट पर भी रखी गई हैं। इन टीमों के बचावकर्ता बाढ़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। बल के महानिदेशक एस एन प्रधान, व्यक्गित रूप से राहत और बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। स्थिति पर नजर रखने के लिए दिल्ली में चौबीसों घंटे काम करने वाला एनडीआरएफ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।
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