महाराष्ट्र में इस साल अबतक का चीनी का 132 लाख टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। राज्य के चीनी आयुक्त शेखर गायकवाड़ ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने कहा, ‘‘हालांकि, ऊंचे उत्पादन के बावजूद चीनी कीमतों के नीचे आने के आसार नहीं हैं।’’
गायकवाड़ अधिशेष गन्ना उत्पादन से संबंधित मुद्दों और इस स्थिति से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस साल अबतक राज्य में 1,187 लाख टन गन्ने की पिराई की जा चुकी है, जबकि लगभग 90 लाख टन फसल अब भी खेतों में पड़ी है। इनमें से ज्यादातर फसल मराठवाड़ा क्षेत्र में है।
उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र में चीनी का रिकॉर्ड उत्पादन इससे पहले 2019-20 में 107 लाख टन का रहा था। इस साल यह लगभग 132 लाख टन तक पहुंच गया है, जो राज्य के लिए एक नया रिकॉर्ड है। उत्तर प्रदेश में अबतक 80 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ है।’’ उन्होंने दावा किया कि राज्य की विभिन्न कंपनियों ने 130 से 140 करोड़ लीटर एथनॉल (गन्ने की पेराई से उत्पन्न शीरे का उप-उत्पाद) के उत्पादन से 9,000-10,000 करोड़ रुपये कमाये हैं, जो कि अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है।
महाराष्ट्र में गन्ना पेराई का सत्र आमतौर पर 120 से 140 दिन और अधिकतम 145 दिनों तक चलता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्य में लगभग 20 चीनी मिलें अधिक गन्ना उत्पादन के कारण 160 दिनों तक चलेंगी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘मराठवाड़ा में 60 लाख टन सहित लगभग 90 लाख टन गन्ने की पेराई अभी बाकी है। हमें उम्मीद है कि इस साल 31 मई तक मराठवाड़ा में गन्ने की पेराई की जाएगी।’’
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