महानदी कोलफील्ड का तालचेर कोलफील्ड लगभग 52 बीटी कोयला संसाधनों के साथ सबसे बड़े कोयला संसाधनों में से एक है, जो देश में कुल अनुमानित कोयला संसाधनों का 15 प्रतिशत है। तालचेर कोलफील्ड में उपलब्ध संसाधनों में से 63 प्रतिशत (33 बीटी) से अधिक संसाधन 300 मीटर गहराई तक है, जो ओपन कास्ट खनन के लिए महत्वपूर्ण संभावना प्रदान करता है।
तालचेर कोलफील्ड ने महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड और आवंटित कोयला ब्लॉकों से वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 95 मिलियन टन (एमटी) से अधिक कोयले का उत्पादन किया है और वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 200 मिलियन टन तथा वित्त वर्ष 2030 तक लगभग 300 मिलियन टन का उत्पादन करने की संभावना है। कुशल कोयला निकासी सुनिश्चित करने के लिए, तालचर कोलफील्ड्स अर्थात् एमसीआरएल (महानदी कोल रेलवे लिमिटेड) में चरणबद्ध तरीके से रेल लाइन का निर्माण शुरू किया गया।
कोयला मंत्रालय ने पीएम गतिशक्ति के तहत एमसीआरएल चरण I और II परियोजना के निर्माण को उच्च प्रभाव परियोजना के रूप में चिन्हित किया है। “महानदी कोल रेलवे लिमिटेड (एमसीआरएल)” को 31.08.2015 को महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल) के 64 प्रतिशत शेयर, इरकॉन के 26 प्रतिशत और ओडिशा औद्योगिक विकास निगम (आईडीसीओ) के 10 प्रतिशत शेयर के साथ शामिल किया गया था।
इस परियोजना की लाइन ओडिशा में अंगुल जिले से होकर गुजरती है। अंगुल और जरापदा भारतीय रेलवे नेटवर्क के मौजूदा स्टेशन हैं। बलराम एमसीएल के तालचेर-बलराम प्राइवेट साइडिंग में मौजूदा लोडिंग स्टेशन है।
14 किलोमीटर लम्बा एमसीआरएल चरण-I (अंगुल-बलराम) के इस वर्ष तक चालू होने की उम्मीद है। यह रेलवे लाइन तालचेर कोलफील्ड में एमसीएल खदानों से निकाले गए 25 मिलियन टन कोयले की ढुलाई करेगी।
54 किलोमीटर के एमसीआरएल चरण- II (बलराम-जरपड़ा-तेंतुलोई) के दिसंबर 2025 तक चालू होने की उम्मीद है। यह तालचर कोलफील्ड के दक्षिणी हिस्से और मध्य भाग में आवंटित कोयला ब्लॉकों को कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
चरण- II का काम तेजी से प्रगति की ओर अग्रसर है, भूमि अधिग्रहण और वन संबंधी स्वीकृति के लिए अधिसूचना प्राप्त कर ली गई है। यह रेलवे लाइन तालचर कोलफील्ड में सीआईएल और गैर-सीआईएल कोयला ब्लॉकों से निकलने वाले 58 मिलियन टन कोयले की ढुलाई करेगी।
इस प्रकार एमसीआरएल रेल कॉरिडोर तालचेर कोलफील्ड से कोयले की निकासी में गेम चेंजर साबित होगा। रेल कॉरिडोर से पारादीप और दामरा बंदरगाहों तक कोयले की रेक की तेजी से आवाजाही में सुधार होगा जिससे रेल नेटवर्क में भीड़भाड़ कम होगी और परिवहन लागत में भी काफी कमी आएगी। रेल नेटवर्क की तुलना में शिपिंग मार्ग बहुत सस्ते हैं और देश के दक्षिणी तथा पश्चिमी क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता में सुधार करते हैं।
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