विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत उपनिवेश काल के दौरान खत्म हुए क्षेत्रीय सम्पर्कों को फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा है। ताशकंद में आज क्षेत्रीय सम्पर्क सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन सम्पर्कों के क्षितिज का विस्तार ब्लादिवोस्तक से लेकर खाड़ी देशों तक और आगे पूर्वी अफ्रीका तक है। उन्होंने कहा कि मध्य एशिया और यूरेशियाई क्षेत्र से सम्पर्क बनाना अभी भी एक चुनौती है।
विदेश मंत्री ने कहा कि 2016 से ही भारत ने ईरान में चाबाहार बंदरगाह के परिचालन के लिए सभी प्रयास किए है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए मध्य एशियाई देशों तक समुद्र के रास्ते सुरक्षित और बाधा रहित सम्पर्क मार्ग उपलब्ध हुआ है।
डॉ. जयशंकर ने कहा कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच सम्पर्क बढ़ाने के लिए सिर्फ भौतिक अवसंरचनाओं की ही जरूरत नहीं हैं, बल्कि इससे जुड़ी अन्य सुविधाएं विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सम्पर्क बनाना एक तरह विश्वास कायम करने जैसा है। यह काम अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सबसे बुनियादी सिद्धांत हैं।
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