मत्स्य पालन, पशुपालन तथा डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा सागर परिक्रमा कार्यक्रम 75वीं स्वतंत्रता के आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रारंभ किया है। सागर परिक्रमा कार्यक्रम का आयोजन तटीय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करते हुए पूर्व निर्धारित समुद्री मार्ग के माध्यम से किया जा रहा है।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला की अध्यक्षता में मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली में सागर परिक्रमा चरण-III के लिए योजना बैठक आयोजित की। कार्यक्रम में भारत सरकार के संयुक्त सचिव (मरीन फिशरीज) ने भाग लेने वालों का स्वागत किया तथा बैठक का एजेंडा तय किया। मत्स्य पालन विभाग के सचिव ने पिछले दो कार्यक्रमों की संक्षेप में जानकारी दी और इस बात पर प्रकाश डाला की मछुआरा समुदायों के बीच बंदरगाहों को पूरा करने और उन्हें उन्नत बनाने, कृत्रिम चट्टानों को बढ़ावा देने जैसी विभिन्न गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री परषोत्तम रूपाला ने सागर परिक्रमा गीत का मराठी संस्करण लॉन्च किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बैठक में शामिल होने, विचारों को साझा करने तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया।
सागर परिक्रमा की तीसरा चरण महाराष्ट्र में चलाया जा रहा है। राज्य के अधिकारियों द्वारा एक अस्थायी योजना का प्रस्ताव किया गया थाI मौसम की उपयुक्तता तथा अन्य प्रभावी कारकों के अनुसार अधिकारियों द्वारा कार्यक्रम स्थानों और तिथियों के बारे में विचार-विमर्श किया गया। रैलियां, साइट विजिट, हाउस विजिट जैसी गतिविधियां आयोजित करने के लिए स्वीकार्य विकल्पों पर चर्चा की गई। राज्य के अधिकारियों ने नेतृत्व द्वारा चर्चा और मार्गदर्शन के लिए कार्यक्रम की तैयारी के दौरान आने वाली चुनौतियों को भी सामने रखा।
इसके बाद मछुआरा समुदायों और भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधियों को चर्चा और विचार विमर्श में अपनी बातों को रखने के लिए आमंत्रित किया गया। जिन बिंदुओं पर चर्चा की गई उनमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वालों के लिए डीजल की सब्सिडी पर राज्य का अनुरोध, गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के दौरान पड़ोसी देशों द्वारा पकड़े गए मछुआरों के संबंध में कार्रवाई, मिरकवाड़ा चरण-II तथा आंगनबाड़ी बंदरगाह को पूरा करना, मछली नहीं पकड़ने की अवधि के दौरान अधिक लाभार्थियों को कवर करने के लिए राशन तथा बीमा लाभ आदि सुनिश्चित करना शामिल है।
यह बैठक एक योजना बैठक है, जिसका उद्देश्य जमीनी चुनौतियों और हितधारकों को अपेक्षाओं को समझने के साथ-साथ ईवेंट प्लानिंग प्रारंभ करना है। उन्होंने सभी अधिकारियों और प्रतिभागियों को सलाह दी कि कार्यक्रम के दौरान नियोजित बैठकों तथा गतिविधियों के मूल में लाभार्थी कनेक्ट होना चाहिए। बातचीत का उद्देश्य मछुआरों तथा हितधारकों की समस्याओं को हल करना तथा भारत सरकार द्वारा लागू की जा रही विभिन्न मत्स्य पालन योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई), केसीसी और एफआईडीएफ के माध्यम से उनके आर्थिक उत्थान की सुविधा प्रदान करना है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने इस बात पर प्रकाश डाला की यद्यपि सभी योजनाएं महत्वपूर्ण रही हैं, लेकिन मछुवारों के बीच केसीसी के बारे में जागरूकता पैदा करना, उनकी सागर परियोजना दौरों के दौरान एक प्रमुख एजेंडा रहा है और रहेगा।
‘सागर परिक्रमा’ का उद्देश्य (i) मछुआरों, तटीय समुदायों और हितधारकों के साथ बातचीत की सुविधा प्रदान करना है ताकि सरकार द्वारा लागू की जा रही विभिन्न मत्स्य संबंधी योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी का प्रसार किया जा सके, (ii) सभी मछुआरों, मछली किसानों और संबंधित हितधारकों के साथ एकजुटता का प्रदर्शन हितधारक आत्मानिर्भर भारत की भावना के रूप में किया जा सके। (iii) राष्ट्र की खाद्य सुरक्षा और तटीय मछुआरा समुदायों की आजीविका के लिए समुद्री मत्स्य संसाधनों के उपयोग के बीच स्थायी संतुलन पर ध्यान देने के साथ उत्तरदायी मत्स्य पालन को बढ़ावा देते हैं, और (iv) समुद्री इकोसिस्सटम की सुरक्षा करना है। ‘सागर परिक्रमा’ कार्यक्रम में समुद्री राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को चरणबद्ध तरीके से कवर करने की परिकल्पना की गई है।
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