भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक साझेदारी (ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-जीपीएआई) के आगामी समर्थन अध्यक्ष के रूप में 12 से 14 दिसंबर, 2023 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में गर्व के साथ वार्षिक जीपीएआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने में सबसे आगे है। जीपीएआई शिखर सम्मेलन आज से शुरू हो रहा है और 28 सदस्य देशों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लगातार विकसित हो रहे परिदृश्य को आकार देने वाले जरूरी मामलों पर गहन चर्चा के लिए एक असाधारण मंच है।
सुबह के सत्र में स्वास्थ्य सेवा, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और जिम्मेदार एआई पर विशेष ध्यान देने के साथ, विभिन्न देशों और क्षेत्रों से आए 25 से अधिक वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस बौद्धिक जमावड़े में, कई समानांतर सत्रों में असंख्य महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिसने अभूतपूर्व महत्व के शिखर सम्मेलन के लिए मंच तैयार किया।
आज पहले दिन, ‘प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एआई के अनुप्रयोग’ शीर्षक के साथ सुबह का सत्र प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने, एआई की बाजार क्षमता का पता लगाने और सभी क्षेत्रों में इसके प्रसार को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों द्वारा एआई को अपनाने में आने वाली चुनौतियों और अवसरों पर केंद्रित था। इसमें मुख्य वक्ताओं में पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा और इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ति राय शामिल थीं। इस सत्र का संचालन द डायलॉग के संस्थापक काज़िम रिज़वी ने किया, और वक्ताओं में द मेडिबे की संस्थापक और सीईओ लैला क्रेमोना; हैप्टिक एआई के सीईओ आकृति वैश्य; डवारा के कार्यकारी उपाध्यक्ष और सह-संस्थापक समीर शाह; एसोसिएशन ऑफ चार्टर्ड सर्टिफाइड अकाउंटेंट्स (एसीसीए) में नीति विकास प्रमुख नारायणन वैद्यनाथन; जियो इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार; आईआईएससी में आर्टपार्क के सीईओ रघु धर्मराजू और गूगल में उभरती प्रौद्योगिकियों, प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत नीति के वरिष्ठ निदेशक डेविड वेलर शामिल थे।
इस सत्र के दौरान चर्चा में इस बात पर जोर दिया कि अन्य ओमिक्स डेटा के साथ मिलकर मास स्पेक्ट्रोमेट्री डेटा से प्रोटीन की पहचान और परिमाणीकरण कृत्रिम प्रोटीन बनाने का समाधान है। एआई-संचालित फार्म मूल्यांकन (खेत स्कोर) और निगरानी (खेत स्कोर नाउ) की सफलता पर चर्चा की गई, जो प्रारंभिक जोखिम पहचान के लिए लाइव मॉनिटरिंग के साथ एआई संचालित ऐतिहासिक फार्म मूल्यांकन है जिसने पारंपरिक ऋण देने वाले बैंक स्कोर के प्रदर्शन को बेहतर किया है। इसमें यह बताया गया कि उन्नत एआई और मशीन लर्निंग का लाभ उठाते हुए सुरभि एक अद्वितीय, मालिकाना थूथन-आधारित मवेशी पहचान समाधान प्रदान करती है। जियो इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत एआई पर चलता है और एआई के उपभोक्ताओं को भारत एआई स्टैक और इसके उपयोग के बारे में पता होना चाहिए। इस सत्र में डेटा को समझने और इसकी अंतर्दृष्टि का मतलब जानने के लिए डैशबोर्ड के साथ-साथ नो कोड एंड लो कोड जैसे प्लेटफार्मों के महत्व पर भी जोर दिया गया।
‘रिस्पॉन्सिबल एआई वर्किंग ग्रुप’ पर दूसरे समानांतर सत्र में सीईआईएमआईए की कार्यकारी निदेशक सोफी फलाहा; महामारी लचीलेपन के लिए जीपीएआई परियोजना के सह-प्रमुख और ऑकलैंड विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर माइकल ओ’सुल्लीवन; स्केलिंग रिस्पॉन्सिबल एआई सॉल्यूशंस के लिए जीपीएआई प्रोजेक्ट के सह-प्रमुख और एआई कॉमन्स के सह-संस्थापक व निदेशक अमीर बनिफ़ातेमी; सैंडबॉक्स के लिए जीपीएआई प्रोजेक्ट के सह-प्रमुख और यूनिवर्सिडैड डी लॉस एंडीज़ में एसोसिएट प्रोफेसर जुआन डेविड गुतिरेज़; सैंडबॉक्स और आयरलैंड के राष्ट्रीय मानक प्राधिकरण के लिए जीपीएआई परियोजना के सह-प्रमुख आदित्य मोहन; आरएआईएसई के लिए जीपीएआई सह-प्रमुख- द फ्यूचर सोसाइटी के संस्थापक और अध्यक्ष निकोलस मियाले; आरएआईएसई– ड्यूक यूनिवर्सिटी के लिए जीपीएआई प्रोजेक्ट के सह-प्रमुख ली टाइड्रिच; सोरबोन विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और आईटी एथिक्स के एमेरिटस प्रोफेसर राजा चाटिला; मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के विधि संकाय में प्रोफेसर कैथरीन रेजिस और विक्टोरिया विश्वविद्यालय में सोशल मीडिया गवर्नेंस के लिए जीपीएआई प्रोजेक्ट सह-प्रमुख एलिस्टेयर नॉट जैसी हस्तियां शामिल हुईं।
यह सत्र 2023 में जिम्मेदार एआई समाधानों को बढ़ाने और एआई समाधानों को जिम्मेदारी से बनाने से जुड़ी चुनौतियों पर विचार-विमर्श पर केंद्रित था। चर्चाओं में ‘कॉम्प्रिहेंसिव- एट होम यूनिवर्सल प्राइमरी हेल्थ केयर’ परियोजना शामिल थी, जो वैश्विक स्वास्थ्य और जिम्मेदार एआई सार्वजनिक खरीद के लिए सैंडबॉक्स पर केंद्रित है। इस सत्र में एआई जनित मूलपाठ का पता लगाने के लिए विश्वसनीय तरीकों की आवश्यकता भी प्रमुख विषय था। इस पर एक वक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को सुरक्षित रखने के लिए हमें और अधिक एआई की आवश्यकता है। इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया कि एआई जेनरेटर बनाने वाली कंपनियों को अपने द्वारा तैयार की जाने वाली सामग्री के लिए विश्वसनीय पहचान उपकरण प्रदर्शित करने होंगे। पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि एआई इकोसिस्टम में व्यवस्थित जेंडर समावेशन बनाना, सार्वजनिक एल्गोरिदम के भंडार स्थापित करना, समुदायों को सशक्त बनाने वाला डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना और लोगों पर एआई प्रभाव के लिए प्रमुख माध्यमों के रूप में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को पहचानना आवश्यक कदम हैं।
सुबह के तीसरे सत्र ‘एआई और वैश्विक स्वास्थ्य: स्वास्थ्य देखभाल को आगे बढ़ाने में एआई की भूमिका’ में हेल्थ एआई के सीईओ डॉ. रिकार्डो बैप्टिस्टा लेइट और नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। इस पैनल में पीएटीएच में भारत और दक्षिण एशिया के लिए डिजिटल स्वास्थ्य के निदेशक समीर कंवर; जीई हेल्थकेयर में इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष गिरीश राघवन; निरामाई की संस्थापक डॉ. गीता मंजूनाथ और आई-दृष्टि के सीईओ एवं संस्थापक किरण आनंदमपिल्लई शामिल रहे।
इस सत्र का संचालन डब्ल्यूएचओ के दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय में डिजिटल स्वास्थ्य के क्षेत्रीय सलाहकार डॉ. कार्तिक अदापा ने की। इस सत्र में स्वास्थ्य देखभाल को आगे बढ़ाने में एआई की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। डॉ. गीता ने स्तन कैंसर का पता लगाने की किफायती, पोर्टेबल और विकिरण मुक्त पद्धति के विकास पर चर्चा की और बताया कि इसी तरह की पहल पंजाब में की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप 22 कैंसर रोगियों का इलाज किया गया। डॉ. किरण ने मधुमेह के कारण आंखों की कमजोरी की पहचान करने की समस्या पर अपनी बात रखी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एआई उपकरण निदान के लिए अधिक सटीक रेटिना छवियां प्रदान कर सकते हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य पर ई-संजीवनी और आयुषम डिजिटल भारत मिशन जैसी प्रभावशाली पहलों पर भी चर्चा की गई। पैनल ने स्वास्थ्य सेवा के संबंध में नीति पर भी चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि विकसित व विकासशील देशों के बीच अंतर को पाटने के लिए इसे निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों पर केंद्रित किया जाना चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की मदद से “सार्वजनिक क्षेत्र के अनुप्रयोगों में जिम्मेदार एआई को आगे बढ़ाना” विषय पर अनुसंधान संगोष्ठी आयोजित की गई। इस संगोष्ठी ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया। 36 से अधिक देशों से आई प्रविष्टियों के विशाल पूल से, 15 असाधारण लेखकों के अंतिम चयन ने जीपीएआई शिखर सम्मेलन को व्यावहारिक आकार दिया। इस संगोष्ठी का समापन ‘विस्तारित सार की पुस्तक’ के विमोचन से होगा, जिसमें इस बौद्धिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए सामूहिक ज्ञान का समावेश होगा।
पहले दिन चार और सत्र हुए जिसमें अनुसंधान संगोष्ठी का समापन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जीपीएआई शिखर सम्मेलन का उद्घाटन शामिल है।
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