भारत में यूनिकॉर्न की लहर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गई है क्योंकि देश ने 2 मई 2022 को अपने 100वें यूनिकॉर्न का जन्म देखा। आज वैश्विक स्तर पर हर 10 में से 1 यूनिकॉर्न का उदय भारत में हो रहा है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग, उपभोक्ता कार्य, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल ने एक ट्वीट के जरिये इस उपलब्धि को उजागर किया।
‘यूनिकॉर्न’ उन दुर्लभ स्टार्टअप को कहा जाता है जो 1 बिलियन डॉलर से अधिक का मूल्यांकन हासिल कर लेता है। भारतीय स्टार्टअप परिवेश यूनिकॉर्न की संख्या के लिहाज से दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है। यहां 5 मई 2022 तक 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं जिनका कुल मूल्यांकन 332.7 अरब डॉलर से है।
वर्ष 2021 के दौरान यूनिकॉर्न की संख्या में भारी उछाल दर्ज किया गया था। इस दौरान कुल 44 स्टार्टअप यूनिकॉर्न 93 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुए।
वर्ष 2022 के पहले चार महीनों के दौरान भारत में 18.9 अरब डॉलर के कुल मूल्यांकन के साथ 14 यूनिकॉर्न तैयार हुए हैं।
उद्यमशीलता की भावना देश के कोने-कोने में मौजूद है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने सभी 36 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 647 जिलों में स्टार्टअप के प्रसार से यह बिल्कुल स्पष्ट है।
स्टार्टअप इंडिया अभियान के शुभारंभ यानी 16 जनवरी 2016 के बाद से 2 मई 2022 तक देश में 69,000 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी गई है। भारत में नवाचार केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि हमने आईटी सेवाओं से 13 प्रतिशत, स्वास्थ्य सेवा एवं जीवन विज्ञान से 9 प्रतिशत, शिक्षा 7 प्रतिशत, पेशेवर एवं वाणिज्यिक सेवाओं से 5 प्रतिशत, कृषि 5 प्रतिशत और खाद्य एवं पेय पदार्थों से 5 प्रतिशत के साथ 56 विविध क्षेत्रों में समस्याओं को हल करने वाले स्टार्टअप को मान्यता दी है।
हालांकि प्रत्येक स्टार्टअप के लिए यूनिकॉर्न बनने की अपनी अनूठी यात्रा होती है लेकिन भारत में स्टार्टअप को यूनिकॉर्न बनने के लिए न्यूनतम समय 6 महीने और अधिकतम समय 26 वर्ष है। वित्त वर्ष 2016-17 तक हर साल लगभग एक यूनिकॉर्न तैयार होता था। पिछले चार वर्षों में (वित्त वर्ष 2017-18 के बाद से) यह संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर साल अतिरिक्त यूनिकॉर्न की संख्या में सालाना आधार पर 66 प्रशित की वृद्धि हुई है।
भारतीय यूनिकॉर्न के मोर्चे पर हमने सदी के पड़ाव पर हैं और घरेलू स्टार्टअप परिवेश आत्मनिर्भरता के मिशन की दिशा में प्रभावी ढंग से पहले की तरह काम कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण स्टार्टअप परिवेश में गहराई से निहित है और वह आगामी वर्षों में भी जारी रहेगी।
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